जबलपुर, डेस्क। मप्र उच्च न्यायालय में रक्षा सम्पदा अधिकारी जबलपुर केंट राजीव कुमार ने अपने जवाब में बताया कि महाराजा पन्ना ने आजादी के बाद अपनी लगभग 1800 एकड़ जमीन रक्षा विभाग को उपहार स्वरूप दी थी। यह जमीन राज्य सरकार ने अनधिकृत रूप से जेके लिमिटेड को आवंटित कर रक्षा मंत्रालय को हानि पहुंचाई। चीफ जस्टिस रवि मलिमथ व जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच ने जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से जवाब के लिए मोहलत मांगी गईं। न्यायालय ने चार हफ्ते का समय देकर अगली सुनवाई 16 अगस्त नियत की।
कटनी के पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल तिवारी की ओर से अधिवक्ता वीके शुक्ला ने न्यायालय को बताया कि 1949 को विंध्य प्रान्त के भारत मे विलय के वक्त महाराजा पन्ना महेंद्र यादवेंद्र सिंह ने अपनी 1800 एकड़ बेशकीमती जमीन रक्षा विभाग को उपहार में दी थी। उस समय भारत सरकार के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इस जमीन का सदुपयोग देश की सुरक्षा के सिलसिले में किया जाना चाहिए था। लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इसकी कोई परवाह नही की। इसका फायदा उठाकर राज्य सरकार ने भी निजी कंपनी जेके सेम लिमिटेड को लाभाविंत करने के लिए यह जमीन उसे आवंटित कर दी। इस प्रक्रिया में पर्यावरण क्षति आदि के बिंदु दरकिनार कर दिए गए। किसी तरह की एनओसी नही ली गई। एक तरह से जमीन मनमाने तरीके से खुर्द-बुर्द की जा रही है। इसके अलावा उक्त भूमि पर कई अतिक्रमण भी हो गए हैं, इन्हें भी हटाने का प्रशासन ने कोई प्रयास नही किया। कई बार उच्चस्तर तक शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई, इसीलिए उच्च न्यायालय की शरण ली गई।
रक्षा मंत्रालय को हानि पहुंचाई जा रही
रक्षा सम्पदा अधिकारी ने अपने जवाब में न्यायालय को बताया कि उक्त जमीन पन्ना के महाराजा ने दानपत्र के जरिए रक्षा मंत्रालय को दी थी। इसके नाम परिवर्तन के लिए कई बार राज्य सरकार को लिखा गया। लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे राज्य सरकार ने यह जमीन अवैध रूप से बिना अधिकार या केन्द्र सरकार की अनुमति के जेके कम्पनी को माइनिंग लीज पर आवंटित कर दी। राज्य सरकार इसकी रायल्टी वसूल रही है, और रक्षा मंत्रालय को हानि पहुंचाई जा रही है। आग्रह किया गया कि उक्त जमीन में चल रही उत्खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

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