जबलपुर, नवनीत दुबे। शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए एक यातायात विभाग होता है जिसमें थाना प्रभारी, एडिशनल साहब, उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक, व आरक्षको की तैनाती होती है, कुछ समय पहले तक शहर के प्रमुख चैराहों ,सिग्नलों, व्यस्ततम व्यापारिक स्थलों में, यातायात विभाग के सफेद शर्ट धारी अपने वरिष्ठ खाकी धारियों के साथ नजर आ ही जाते थे, लेकिन बीते कुछ समय से शहरवासियों की आंखें इनके दीदार के लिए व्यथित और आतुर दृष्टिगत हो रही हैं? आप सोच रहे होंगे कि कलमकार का आशय क्या है तो मुद्दे की बात पर आते हैं, फ्लाईओवर व अन्य विकास कार्यों के चलते संस्कारधानी के हाल वैसे ही बेहाल हैं, क्योंकि कच्छप गति से चल रहे विकास कार्य विशेष तौर पर फ्लाईओवर निर्माण के चलते बदहाली की धूल आमजन को अपना शिकार बना रही है और शहर के प्रमुख चैराहों से लेकर अन्य व्यस्ततम मार्गों में यातायात व्यवस्था चैपट है, वाहनों की लंबी कतारें हर पल जाम के हालात निर्मित कर रही है, पर जिम्मेदारी यातायात विभाग के थाना प्रभारी से लेकर अधीनस्थ पुलिसकर्मी नदारद ही नजर आते हैं जिसे देखकर आक्रोशित जनमानस यह कहते नजर आ रहा है कि यातायात विभाग कुंभकरण की नींद में सो रहा है और वरिष्ठ अधिकारी वातानुकूलित कक्ष में अधीनस्थों को यातायात संबंधी दिशा निर्देश दे रहे हैं और अधीनस्थ कौन दिशा निर्देशों की कन बहरी कर अपनी मर्जी के मालिक बने हुए हैं? हालांकि ऐसा नहीं है कि यातायात पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य निष्ठा का ईमानदारी से पालन नहीं करते हैं ष्बिल्कुल करते हैं साहबष् महीने के आखिरी में बराबर प्रमुख मार्गों पर तैनात नजर आते हैं वह बात अलग है यातायात व्यवस्था सुचारू रखने नहीं बल्कि वाहन चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली करने तो वहीं थाना प्रभारी स्तर के अधिकारी बायपास में या अन्य स्थानों पर बड़े मुर्गों को अपना शिकार बनाने अपने अधीनस्थों के साथ कर्तव्य निष्ठा का बखूबी निर्वहन करते हैं? विडंबना ही कहेंगे संस्कारधानी में प्रतिदिन रेंगते यातायात और अवस्थाओं का दंश झेल रहे शहरवासियों की परेशानी को दरकिनार कर जिम्मेदार सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हुए हैं?

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