जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जबलपुर जिले के मास्टर प्लान से संबंधित जनहित याचिका मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से वापस ले ली। इसके साथ ही राज्य शासन को नए सिरे से लीगल नोटिस भेज दिया। यह जानकारी मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे ने दी।

उन्होंने बताया कि समाजसेवी रजत भार्गव के साथ मिलकर अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय के माध्यम से जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसके जरिये तीन वर्ष से अटके जबलपुर के मास्टर प्लान को लेकर चिंता जताई गई थी।

दरअसल जबलपुर का मास्टर प्लान वर्ष 2021 से अटका पड़ा है। उसे अनिवार्य कानून नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम-1973 के तहत अब तक मंजूरी नहीं प्रदान की गई है। इसीलिए मप्र शासन को जबलपुर मास्टर प्लानजल्द से जल्द क्रियान्वित करने की मांग के साथ नए सिरे से लीगल नोटिस भेजा गया है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने जनहित याचिकाकर्ता को लीगल नाेटिस भेजने की स्वतंत्रता देते हुए जनहित याचिका वापस लेने की मांग मंजूर कर ली। लीगल नोटिस में कहा गया है कि एक जनवरी 2008 को जबलपुर के मास्टर प्लान में क्षेत्र 25 वर्ग किलोमीटर व 109 ग्राम सम्मिलित थे। साथ ही निवेश क्षेत्र 245 वर्ग किलोमीटर था।

बाद में 25 जुलाई 2014 में 62 ग्राम पुनः सम्मिलित किए गए। जिस वजह से क्षेत्र 25 किलोमीटर से बढ़कर 50 किलोमीटर हो गया। इसके साथ ही निवेश क्षेत्र बढ़कर 400 वर्ग किलाेमीटर हो गया। इस वजह से नए मास्टर प्लान की जरूरत है, लेकिन वह पिछले तीन वर्षों से गंभीरता नदारद है।

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