जबलपुर: सीजेएम कोर्ट से डॉक्टर दंपति को झटका, जमानत अर्जी निरस्त, 13 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जेल

जबलपुर: सीजेएम कोर्ट से डॉक्टर दंपति को झटका, जमानत अर्जी निरस्त, 13 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जेल

जबलपुर, डेस्क। सेंट्रल इंडिया किडनी हास्पिटल के संचालक डॉ. अश्विनी पाठक व उसकी पत्नी डॉ. दुहिता पाठक की जमानत अर्जी निरस्त कर दी गई। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आलोक प्रताप सिंह की अदालत ने दोनों को 13 सितंबर तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। लार्डगंज पुलिस ने पूर्व निर्देश के पालन में एक दिन की पुलिस रिमांड के तहत दोनों आरोपितों से आवश्यक पूछताछ के बाद सीजेएम न्यायालय के समक्ष पेश किया। इस दौरान शेष पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड बढ़ाए जाने पर बल दिया गया। आपत्तिकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र जाट की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता, शहजाद अहमद शाह व भावना चौधरी ने आपत्ति प्रस्तुत की। वहीं अन्य आपत्तिकर्ता रूप सिंह की ओर से अधिवक्ता संतोष आनंद ने जमानत अर्जी निरस्त करने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि आरोपितों ने सफेदपोश अपराध को अंजाम दिया है। जिस समाज ने नामवर डॉक्टर बनाया, उसी को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं के नाम पर लूट-खसोट की गई। भोले-भाले गरीब लोगों को सामान्य बीमारी के बावजूद अपने अस्पताल में गंभीर मरीज के रूप में भर्ती किया गया। अस्पताल के अलावा खुद के होटल में रखा गया। दूसरी तरफ उनके नाम पर आयुष्मान योजना के फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर राशि अर्जित की गई। यह कृत्य व केवल समाज बल्कि राष्ट्र के साथ द्रोह की परिधि में आता है। इससे लोकहितकारी राष्ट्रीय योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन को पलीता लगता है। राजनीतिक रसूख रखने वाले आरोपित दंपति पूर्व में भी इस तरह के कृत्यों मेें संलिप्त रहे हैं। यदि इस तरह के आरोपितों को जमानत का लाभ दिया गया तो समाज में बेहद गलत संदेश जाएगा। न्यायालय ने तर्क सुनने के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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