डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। जल संसाधन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार एक बार फिर सामने आया है। अमरपुर जलाशय और उससे जुड़ी नहरों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। साल 2021-22 में मनरेगा के तहत अमरपुर जलाशय और नहरों की मरम्मत के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन काम का हाल यह है कि अब तक न तो नहरों की सफाई हुई है, न ही मरम्मत या पुलिया निर्माण जैसा कोई कार्य जमीन पर नजर आता है।
कागजों में निर्माण कार्य पूरा बता दिया गया, और इसके आधार पर लाखों रुपये के बिल लगा कर राशि आहरित कर ली गई। कार्यस्थल में आज भी कुछ मात्रा में रेत, गिट्टी और पाइप लावारिस हालत में पड़े हुए हैं। तत्कालीन एसडीओ एस.के. बिट्ठले, वर्तमान एसडीओ और उपयंत्री नारायण देशमुख पर किसानों की उम्मीदों को रौंदने और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने का आरोप लग रहा है। किसानों का कहना है कि खरीफ के दौरान क्षतिग्रस्त नहरों से खेतों में पानी भर जाता है, जबकि रबी में सिंचाई के लिए नहरें सूखी रहती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 30 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जा रही है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। अमरपुर जलाशय से सिंचाई के लिए लक्षित 153 हेक्टेयर भूमि के किसान आज भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
फर्मों को किया गया भुगतान, लेकिन कार्य नदारद…
2021-22 से 2023-24 तक अमरपुर जलाशय के 10 हिस्सों में मरम्मत कार्य स्वीकृत किए गए। इन कार्यों के तहत खनूजा ट्रेडर्स, दिगंबर हार्डवेयर, खनूजा फैशन पैलेस और सिग्निक्स कंस्ट्रक्शन जैसी फर्मों को मिट्टी, मुरूम, सीमेंट, गिट्टी, लोहा और सरिया के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया। मौके पर कोई ठोस निर्माण नहीं, नहरें टूटी और जर्जर हालत में पड़ी हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता बल्कि योजनाबद्ध भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है। किसानों की मांग – हो उच्चस्तरीय जांच पीड़ित किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अमरपुर जलाशय से जुड़ी सभी योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसानों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो।



