डिंडौरी,राठौर रामसहाय मर्दन| जिले में जनसुनवाई की एक अनोखी पहल की शुरुआत 15 अप्रैल 2025 को कलेक्टर नेहा मारव्या ने की थी। इस मॉडल के तहत हर ग्राम पंचायत में पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, पटवारी, सरपंच और राजस्व निरीक्षक जैसे जिम्मेदार अधिकारी समन्वय के साथ जन समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने के लिए उपस्थित रहने वाले थे।
हालांकि, इस सराहनीय प्रयास को ज़मीनी स्तर पर वह समर्थन नहीं मिला जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई ग्राम पंचायतों में राजस्व विभाग के अधिकारी जनसुनवाई में शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार द्वारा समानांतर मीटिंग रखे जाने की वजह से पटवारी जनसुनवाई में नहीं पहुंच पाए। परिणामस्वरूप, राजस्व से संबंधित शिकायतें लेकर पहुंचे ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ा। यह स्थिति जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत समनापुर, बंजारा, मोहती, डुगरिया, केवलारी, बिलाईखर, देवलपुर, मारगांव, करेगांव, जाता डोंगरी, भाजी टोला, चांदरानी, सरई, लदवानी, छांटा, पड़रिया दो, प्रेमपुर, नान समेत जिले की कई ग्राम पंचायतों में देखने को मिली।
स्थानीय नागरिकों ने इस लापरवाही पर नाराज़गी जाहिर की है। जबकि प्रशासन का दावा है कि यह मॉडल जिला स्तर पर आने वाली समस्याओं को जड़ से खत्म करने में कारगर साबित होगा और जनता के भरोसे को मज़बूती देगा। लेकिन अगर जिम्मेदार अधिकारी ही अनुपस्थित रहेंगे, तो इस जन-हितैषी पहल की सफलता संदेह के घेरे में आ जाएगी।



