जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत जुनवानी मामला…
डिंडौरी, रामसहाय मर्दन | जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत जुनवानी में वित्तीय अनियमितता की गंभीर शिकायत के बाद भी सात महीने बीतने पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना, जिले में प्रशासनिक ढिलाई और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। सचिव गजरूप सिंह मरावी को तत्कालीन जनपद सीईओ निखिलेश कटारे द्वारा दो बार कारण बताओ नोटिस और एक बार अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें 2 दिवस में जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया था, परंतु सचिव द्वारा अब तक कोई उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया।
फरमान को ठेंगा, जवाब देने की नहीं समझी जरूरत…
तत्कालीन जनपद सीईओ द्वारा 10 सितंबर 2024 को अंतिम नोटिस जारी कर सचिव को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि धुंधले बिल लगाकर 5वें वित्त आयोग की राशि का गलत तरीके से आहरण और व्यय किया गया है। यह जानकारी “साईड लुक” समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर सामने आई थी। खबर के अनुसार पंचायत दर्पण पोर्टल पर डाले गए बिल इतने धुंधले थे कि उन्हें पढ़ने के लिए दूरबीन की आवश्यकता पड़ती।
नोटिस में उल्लेखित था कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के जुलाई माह में ₹1,83,000 की राशि कार्यालय व्यय एवं अन्य सामग्री के नाम से आहरित की गई, जबकि 5वें वित्त की कोई राशि उस समय शासन द्वारा पंचायत को प्रदाय ही नहीं की गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि सचिव ने 5वें वित्त की राशि का दुरुपयोग किया।

जिला पंचायत को भेजा गया अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु पत्र….
नोटिसों की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ निखिलेश कटारे ने सचिव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु जिला पंचायत को औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि सचिव गजरूप सिंह मरावी पंचायत के विकास में रुचि नहीं लेते और लगातार शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं। यह कृत्य म.प्र. पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम 2011 के नियम 4 का स्पष्ट उल्लंघन है।
महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं….
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पूरे मामले को सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जिला पंचायत द्वारा सचिव के विरुद्ध कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह संदेश जा रहा है कि नोटिस और निर्देश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं, और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को मौन प्रश्रय मिल रहा है।
क्या यही है जवाबदेही की स्थिति?
ग्राम पंचायत जुनवानी के इस मामले ने पूरे जनपद में प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अगर समय पर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल वित्तीय अनुशासन को तोड़ेगा, बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों में भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा।



