डिंडौरी:- दो दिवसीय नवाचार उत्सव एवं प्रर्दशनी का शुभारंभ….

डिंडौरी:- दो दिवसीय नवाचार उत्सव एवं प्रर्दशनी का शुभारंभ….

◆आदिवासी महिला पुरुष कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं की की गई प्रदर्शनी:-

डिंडौरी| प्रेरणा केन्द्र नवाचार गोष्ठी कक्ष इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक जिला अनूपपुर म.प्र .के तत्वावधान में दिनांक 8 एवं 9 अक्टूबर को दो दिवसीय नवाचार उत्सव एवं प्रर्दशनी का शुभारंभ प्रोफेसर डॉ. प्रकाशमणी त्रिपाठी कुलपति एवं शीला त्रिपाठी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के हवनूर सांस्कृतिक सभागार में प्रदर्शनी का कुलपति प्रकाश मणी त्रिपाठी एवं शीला त्रिपाठी के द्वारा फीता काटकर एवं नारियल फोड़कर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कुलपति के द्वारा नवाचार के प्रयासों की सराहना करते हुये लेंटाना एवं खादी , पारंपरिक चाॅंवल के स्टालों का अवलोकन किया एवं उन्हेे बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर पुनश्च विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में आने का आमंत्रण दिया। कुलपति के कार्यलय में सभी नवाचारिययों से गंभीर चर्चा करते हुये मार्गदर्शन किया व यह आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय के ओर से हर संभव प्रयास व मद्द की जायेगी। कुलपति के साथ त्रिपाठी ने कारीगर महिलाओं को सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया व उनके कार्यो की तारीफ की । अभिलाषा पांडे को नेश्नल इंस्टीट्यूट आॅफ वीमेन चाईल्ड एंड यूथ डेव्हलपमेंट नागपुर के प्रेरित समूहों की उपलब्द्धियों को महत्वपूर्ण बताया । प्रोफेसर इंचार्ज लाईब्रेरी पी के सामल, प्रोफेसर राघुवेन्द्र मिश्रा, संकाय प्रमुख वोकेशन स्टडीज,प्रो आशीष माथुर ,आजीविका प्रकोष्ठ एवं अनेक गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आॅडर देते हुये प्रदर्शनी को सफल बनाया। विशेष उल्लेखनीय हैं, कि विश्वविद्यालय के विभिन्न संकाय प्रमुखों से पे्ररणा केन्द्र के नवाचार कक्ष से युवा छात्रों को जोड़कर बौद्धिक संपदा के अधिकार को बढ़ावा देने हेतु अध्यक्ष डाॅ आलोक पांडया ने प्रस्तावित किया। वही कुलपति त्रिपाठी और प्रोफेसरो की टीम एवं विश्वविद्यालय के छात्रों के द्वारा प्लास्टिक के विकल्प बायो प्लास्टिक को जानने में खासी रुचि दिखाई साथ ही यहाॅ चित्रगुप्त सागर महाकाव्य और अन्नदाता की आत्महत्या किताब का अवलोकन कर इसके लेखक सारस्वत मुरली मनोहर श्रीवास्तव से आवश्यक जानकारी ली ,इसके अलावा वारासिवनी हथकरघा के कपड़ो की जानकारी लेने के बाद मंडला, डिंडोरी से लेंटाना से निर्मित फर्नीचर और घरेलू सामग्रियों ,और घास से बनाये गए कलात्मक रोजगारोन्मुखी सामग्रियों की जानकारी भी ली। इस अवसर पर बालाघाट से सारस्वत मुरली मनोहर श्रीवास्तव, भुवन उपवंशी,वरिष्ठ पत्रकार हरीश लिल्हारे और वर्णन श्रीवास्तव ने अलग अलग विषयो को लेकर अपनी बात भी रखी यंहा विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर की टीम के द्वारा रखे गए विषयो पर नवाचार कार्यक्रम के तहत कार्यो के संपादन को लेकर आश्वस्त किये। वही विश्वविद्यालय के कान्फरेन्स हाल में कुलपति त्रिपाठी और प्रोफेसर की टीम के समक्ष बालाघाट, वारासिवनी, डिंडौरी,छत्तीसगड़ आदि स्थानों से आये नवाचार के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगो की महत्वपूर्ण बैठक की गई जिसमें बालाघाट के लेखक सारस्वत मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने चित्रगुप्त सागर महाकाव्य के संदर्भ में विस्तृत चर्चा की गई। यंहा इंजीनियर भुवन उर्फ बाबा उपवंशी ने पर्यावरण और जीव जंतुओं के लिए घातक प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर बायो प्लास्टिक जैव विघटित प्लास्टिक के निर्माण करने और इसके विस्तार की बात रखी जिस पर विश्व विद्यालय के प्रोफेसर के द्वारा प्रकृति हित मे इसके स्टार्च और दाना बनाने के संबंध में कार्य को विश्व विद्यालय द्वारा प्रोत्साहित कर आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया,यंहा अधिवक्ता वर्णन श्रीवास्तव के द्वारा अनुसूचित जनजाति में कानून की जानकारी बढ़ाने और अपने अधिकारों को लेकर जनजागृति लाने कानून की पढ़ाई लॉ के विषय को प्रारम्भ करने की बात पर जोर दिया गया। दो दिवसीय आयोजन के समापन के अवसर पर डाॅ आलोक श्रोत्रीय, डाॅ आलोक पांड्या, डाॅ आशीष माथुर ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देने की बात कही। इस अवसर पर आतुल्य तन्मय रमण, मनीष झारिया, शिवानी सिंह, हेमंत भलावी, ओम प्रकाश यादव, संगम प्रजापति, प्रांजल सिंह, सुदर्शना भवेदी, साहिल साकेत, अनिकेत राम, शालिनी सिंह , रूपराम उपस्थित रहें।

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