डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जिले के विकासखंड बजाग अंतर्गत कलेक्टर नेहा मारव्या ने बुधवार को शासकीय संस्थाओं, छात्रावासों और आंगनवाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की हकीकत जानी। इस दौरान कई स्थानों पर लापरवाही, अनियमितता और गुणवत्ता में भारी कमी पाई गई, जिस पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
निरीक्षण की शुरुआत ग्राम बोंदर के आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास से हुई, जहां अधीक्षक मदन सिंह कुशराम अनुपस्थित पाए गए। छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता खराब पाई गई तथा निरीक्षण के समय एक भी छात्र मौजूद नहीं था। साफ-सफाई और पेयजल की स्थिति खराब मिलने पर कलेक्टर ने सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग को अधीक्षक के स्थान पर नई पदस्थापना के निर्देश दिए। साथ ही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच हेतु एसडीएम और सहायक आयुक्त को दो दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
डुमरटोला प्राथमिक शाला और घोपतपुर आंगनवाड़ी केंद्र के निरीक्षण में कलेक्टर ने बच्चों से पाठ्यपुस्तकों से सवाल पूछे और शिक्षकों को टाइम टेबल के अनुसार पढ़ाने के निर्देश दिए। वहीं, नवीन आंगनवाड़ी भवन में छत से पानी टपकने की शिकायत पर उन्होंने सहायक यंत्री एवं एसडीएम को तकनीकी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
इसके बाद कलेक्टर ने ग्राम पंचायत सरवाही में सात वर्षों से अधूरे कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास का निरीक्षण किया। भवन की छत से रिसाव, असमान खंभे, छोटी-बड़ी सीढ़ियां, बिना खिड़की के शौचालय, और रसोई में पानी भरने जैसी कई खामियों पर उन्होंने निर्माण एजेंसी की लापरवाही को उजागर किया। इस पर तीन दिवसीय गुणवत्ता जांच टीम गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
वहीं पुराने कस्तूरबा गांधी छात्रावास में 50 सीट की जगह 192 बालिकाएं रहने की स्थिति देखकर कलेक्टर ने बिस्तर, मच्छरदानी, खिड़कियों में जाली और साफ-सफाई की व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश अधीक्षक को दिए।



