जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कनाईसांगवा का मामला…
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। सरकार द्वारा पंचायतों में किए जा रहे भुगतानों में पारदर्शिता लाने के लिए चाहे कितने भी प्रयास क्यों न किए गए हों, लेकिन सरपंच-सचिवों की मिलीभगत से उसमें कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार के रास्ते निकाल ही लिए जाते हैं। तमाम नियमों के बावजूद पंचायतों द्वारा खुलेआम धुंधले बिल,बिना जीएसटी नंबरों के बिलों पर लाखों रू.का भुगतान किया जा रहा है जिससे शासन को जहां एक ओर लगातार राजस्व की क्षति हो रही है, तो वहीं जितना भुगतान पंचायतें करती है उसमें आधा कार्य भी नहीं हो रहा है और जो हो रहा है वह भी घटिया स्तर का हो रहा है।
ये रहा पूरा मामला…
दरअसल ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कनाईसांगवा का सामने आया है जहां सरपंच—सचिव के द्वारा सरकारी योजनाओं की राशि में भारी अनियमितता की गई है।
जानकारी के मुताबिक,पंचायत के सरपंच और सचिव के द्वारा 5वें राज्य वित्त आयोग और 15वें केंद्रीय वित्त आयोग से प्राप्त विकास मद की राशि का फर्जी बिलों, धुंधले बिल और अमान्य फोटो के आधार पर मनमाना भुगतान कर लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया है।

स्टेशनरी और अन्य व्यय के नाम पर 5 वें वित्त की राशि का मनमाना भुगतान…
बता दें कि ग्राम पंचायत कनाईसांगवा सरपंच सुलोचना बनवासी, सचिव हृदय सिंह भवेदी के द्वारा भुगतान किए गए अधिकांश बिल धुंधले है जिसे दूरबीन लगा कर भी नहीं पढ़ा सकता है। मजे की बात यह है की अधिकांश बिल स्टेशनरी और अन्य व्यय के बिना जीएसटी नबंर के बिल लगाए जा रहे है और हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी बिना जीएसटी नबंर वाले बिलों को पास कर भुगतान भी कर दे रहे है, जबकि शासन के नियमानुसार पंचायतों द्वारा पांच हजार से अधिक के बिलों का भुगतान बिना जीएसटी नंबर के नहीं किया जा सकता, इसके बावजूद सरपंच-सचिव के द्वारा अपने चहते सप्लायरों को ग्राम पंचायत के विभिन्न मदों से साम्रगी खरीदी,स्टेशनरी सामग्री,किराना सामग्री, होटल ढाबा और अन्य निर्माण कार्यो में खर्च के नाम पर बिना जीएसटी नंबर के बिल लगाकर जमकर धांधली की जा रही है।
15 वें वित्त की राशि का बंदरबाट….
बता दें यहीं हाल केंद्रीय सहायक राशि 15 वें की है जहां जिम्मेदारों के द्वारा 15 वें वित्त आयोग की राशि में भारी अनियमितता बरती गई है। बता दें कि ग्राम सरपंच,सचिव केंद्रीय सहायता 15 वें वित्त राशि का भुगतान गाइड लाइन के विपरीत, फर्जी बिल, बिना प्रयोजन, बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर लाखों रुपए का भुगतान अपने चहेते सप्लायर को मटेरियल खरीदी के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से किया गया है। गौरतलब यह कि अधिकारी भी फर्जी, धुंधले बिल अमान्य फोटो बिलों की जांच करे बिना ही लाखों रुपए का बिल पास कर भुगतान कर रहे हैं।
नियमों की अनदेखी,पारदर्शिता के सिस्टम को सरपंच—सचिव लगा रहे पलीता….
ई ग्राम स्वराज में लगे बिलों के अनुसार डिंडौरी जनपद पंचायत के कनाईसांगवा ग्राम पंचायत में 2024-25 से 2025- 26 में 15वें वित आयोग के लगभग लाखों रुपयों के बिलों का भुगतान बिना प्रयोजन, बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर सरपंच,सचिव के द्वारा बंदरबाट किया गया है। 15 वें वित्त योजना में प्रावधान है कि सरपंच, सचिव को ग्रामसभा में अनुमोदन कराकर ग्राम पंचायत विकास कार्यक्रम में चयनित कार्य को 60 -40 के रेसियो में कराना होता है। इसके तहत स्वच्छता में 30, शिक्षा में 30, अधो संरचना में 40 प्रतिशत प्लान के तहत केंद्रीय सहायता राशि 15वें वित्त से ग्राम पंचायत का विकास करना होता है, लेकिन जीपीडीपी कुछ और बनाते हैं और खर्च कुछ और करते है।
इनका कहना है,,
आपके माध्यम से जानकारी मिली है,मैं बिलों को चैक करवा लेता हूँ।
प्रमोद झा, प्रभारी सीईओ,जनपद पंचायत डिंडौरी



