डिंडौरी:- नर्मदा नदी में मिल रहे नालों के पानी मामले पर अधिवक्ताओं की पहल पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मामला दर्ज

डिंडौरी:-  नर्मदा नदी में मिल रहे नालों के पानी मामले पर अधिवक्ताओं की पहल पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मामला दर्ज

(रामसहाय मर्दन) डिंडौरी। नगर के युवा अधिवक्ता सम्यक् जैन, मनन अग्रवाल एवं धीरज तिवारी ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में मामला दर्ज कराया है। याचिका में बताया कि यह एक निहित अधिकार है, जो जल प्रदूषण को रोकने और नियंत्रित करने के लिए अपनी विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से राज्य को एक कर्तव्य प्रदान करता है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पानी के अधिकार की गारंटी है और किसी को भी इससे वंचित नहीं किया जा सकता है। परंतु डिंडोरी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने के कारण, अनुपचारित सीवेज को सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पानी के अधिकार से वंचित करता ह। साथ ही इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल याने एनजीटी में याचिका दायर की गयी थी। जिसमें नर्मदा में गंदे नाले नाली का पानी मिलाया जा रहा हैं, अतिक्रमण हो रहे हैं जिसकी वजह से लगातार नदी का जल दूषित हो रहा है। इसके पहले ही एनजीटी ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट समेत वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के आदेश दिए थे। पीसीबी की रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने जिला प्रशासन को तत्काल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के आदेश दिए थे जिसके बाद भी सम्बंधित विभाग सुध नहीं ले रहा है । वही राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2016-17 में अपनी नर्मदा यात्रा के दौरान जल शोधन संयंत्र की किस्त के लिए 31 करोड़ 53 लाख रुपये की स्वीकृति की घोषणा की, कार्य योजना बनाई, करोड़ों रुपये की धनराशि जारी की लेकिन नाले के पानी को नर्मदा में मिलने से रोकने में प्राधिकरण विफल रहा।

युवा अधिवक्ताओं ने मांग की है कि –

-राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए जो गंभीर प्रदूषण पैदा करने और नदी में अनुपचारित सीवेज की रिहाई को रोकने में विफल रहने के लिए नर्मदा में सीवेज छोड़ते हैं।

-डिंडौरी में स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचने के लिए नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए प्राधिकरण को निर्देश देना और नदी में घरेलू सीवेज और ठोस कचरे के अशोधित अपशिष्ट के निर्वहन को स्थायी रूप से रोका जाए।

-नदी के आसपास 100 मीटर के दायरे में पॉली कैरी बैग और प्लास्टिक सामग्री के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए।

-वन विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नदी के किनारे पेड़ों की कटाई न हो।

-नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को नर्मदा नदी में जाने वाले ठोस कचरे को नियंत्रित करने और रोकने के लिए सख्त कार्रवाई और कदम उठाए।

-एमपीपीसीबी को नर्मदा नदी में पानी की गुणवत्ता की कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ-साथ विश्लेषण रिपोर्ट की निगरानी और प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया जाये।

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