डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। प्रदेश में एक जुलाई से नया शिक्षा सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन डिंडौरी जिले सहित कई जनजातीय अंचलों की स्कूलों में अभी भी शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। मध्यप्रदेश शासन के लोक शिक्षण संचालनालय ने एक जुलाई से अतिथि शिक्षक नियुक्त करने का आदेश तो जारी कर दिया है, परंतु जनजातीय कार्य विभाग अब तक मौन है। इससे आदिवासी अंचलों की स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था ठप होने की आशंका बढ़ गई है।
डिंडौरी जिले में शिक्षकों के थोकबंद स्थानांतरण के बाद भी कार्यमुक्ति की प्रक्रिया अधूरी है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकांश शिक्षकों को अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है और न ही उनकी नई पदस्थापनाएं की गई हैं। शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण सैकड़ों शालाएं शिक्षक विहीन स्थिति में हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
जनजातीय कार्य विभाग की सुस्ती का असर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में अधिक देखने को मिल रहा है। वहीं जिला प्रशासन की लचर व्यवस्था ने हालात को और बदतर बना दिया है। पिछले चार माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद रिक्त पदों पर शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो पाई है।
हालांकि सरकार द्वारा जुलाई 2024 में यह निर्देश जारी किया गया है कि प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम दो शिक्षक, माध्यमिक में तीन शिक्षक और आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था की जाए। परंतु यह आदेश धरातल पर उतरता नजर नहीं आ रहा है। जिले में न अतिथि शिक्षकों की बहाली हो रही है और न ही नियमित शिक्षकों की पदस्थापना। ऐसे में शिक्षा सत्र 2024-25 की शुरुआत से पहले ही डिंडौरी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।


