डिंडौरी| शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का मेकलसुता महाविद्यालय में हुआ कार्यक्रम….

डिंडौरी| शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का मेकलसुता महाविद्यालय में हुआ कार्यक्रम….

डिण्डौरी(रामसहाय मर्दन)| स्थानीय मेकलसुता महाविद्यालय में एक दिवसीय व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं मेकलसुता महाविद्यालय की सहभागिता रही। कार्यक्रम का मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं आत्मनिर्भर भारत रहा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता अशोक कड़ेल संचालक मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी भोपाल, मुख्य अतिथि प्रो. सुरेंद्र सिंह निदेशक कौशल विकास संस्थान रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेंद्र कुररिया वरिष्ठ प्राध्यापक शास. आदर्श विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर, सारस्वत अतिथि डाॅ. रामकुमार रजक प्राध्यापक शास. ओएफके खम्हरिया कॉलेज जबलपुर, डॉ. प्रदीप द्विवेदी रजिस्ट्रार मेकलसुता महाविद्यालय, कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी प्राचार्य मेकलसुता महाविद्यालय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ वीणावदिनी मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना की गई। तत्पश्चात् अतिथियों का स्वागत किया गया। स्वागत् पश्चात महाविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के भूमिका पर प्रकाश डालते हुए डॉ.बिहारी लाल द्विवेदी ने न्यास और महाविद्यालय संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किए गए कार्यक्रमों के संबंध में विभिन्न विषयों पर अपनी बात को व्यक्त करते हुए बताया कि महाविद्यालय विगत कोरोना काल के समय से न्यास के साथ कार्य करना प्रारंभ किया गया। जिसमें विभिन्न सेवा कार्य, चिकित्सा शिविर, वृक्षारोपण, रक्तदान शिविर, टीकाकरण शिविर, आत्मनिर्भर भारत, चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर कार्यशाला, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के संबंध में कार्यक्रम एवं देश के महान सपूतों, बलिदानियों की जन्मजयंती पर कार्यक्रम करते रहा है। महाविद्यालय न्यास के आयामों पर कार्य कर रहा है, जो आज डिण्डौरी ही नहीं बल्कि अपने कार्य प्रदेश में प्रांत स्तर पर कार्य करना चाहिए। हमारे महाविद्यालय विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हुए हैं, स्वरोजगार के क्षेत्र में अनेक छात्र-छात्रा आगे आये हैं, साहित्य लेखन के क्षेत्र में हमारे यहां के स्टाफ के सदस्य कार्य कर रहे हैं। संयोजक प्रो. निरंजन पटेल ने अवगत कराया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पिछले 2 वर्षों से लागू हो चुकी है और छात्र/छात्राओं को इसका लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इसके प्रचार-प्रसार हेतु इस प्रकार की कार्यशालायें आयोजित की जाती हैं, जिससे शिक्षा नीति के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों तक पहुंच सके। नवीन शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत बनाने में भी सहयोगी साबित हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न विषयों को लेकर आत्मनिर्भर भारत बनाने तक की यात्रा हम कैसे सफलतापूर्वक तय कर सकते हैं, इस उद्देश्य हेतु यह कार्यक्रम रखा गया है।

व्यवसायिक शिक्षा भी हिन्दी भाषा में –

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अशोक कड़ेल जी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में यह आवश्यक है कि हमें किन बातों पर विचार करना है, अपने व्यक्तित्व विकास कैसे कर सकते हैं। ज्ञान तो सब में है पर उस पर से किस चीज को आत्मसात करना है। यह बताना शिक्षक का काम है। देश की आजादी के बाद 1951 में पहला आयोग बना तब से लेकर 2020 तक शिक्षा नीति में लगातार परिवर्तन चल रहा है। वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय भाषा के साथ ही भारत को आगे बढ़ाने में कारगर सिद्ध होगी। कोविड के समय में इसे लागू किया गया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का केंद्र बिंदु शिक्षक हैं। पांचवी, आठवीं या उससे आगे की शिक्षा अब अपनी मातृभाषा में हो सके। मैकाले की शिक्षा पद्यति ने शिक्षा की रीढ़ ताड़ने का काम किया, इसमें लोग नौकरी के पीछे भागते थे, लेकिन नवीन शिक्षा नीति के माध्यम से हम नौकरी देने वाले लोग तैयार करेंगे, यही आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना है।

भारत विश्वगुरु बनने जा रहा है –

प्रो. सुरेंद्र सिंह ने आत्मनिर्भर भारत पर जानकारी देते हुए बताया की भारत विश्व गुरु बनने जा रहा है और आत्मनिर्भर भारत को बनाने में पारंपरिक शिक्षा एवं व्यवसायिक शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारे अंदर शिक्षा के साथ-साथ कोई ना कोई कौशल भी होना आवश्यक है, हमारे दिमाग में यह डाला जाता है कि हम आगे चलकर नौकरी पा सके किंतु अब नई शिक्षा नीति में आत्मनिर्भर बनने की सोच को प्राथमिकता दी जा रही है। जीडीपी बढ़ाने के लिए नए नए उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, राष्ट्रभक्ति आवश्यक है जो भारत को विश्व गुरु और आत्मनिर्भर बनाने में सहयोगी होगी। पढ़ाई के साथ कौशल को विकसित करना ही नवीन शिक्षा पद्यति उद्देश्य – डॉ. राजेंद्र कुररिया ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अध्ययन के संबंध में बताया कि यदि हम 40 दिन तक कोई भी कार्य करते हैं तो वह हमारे अभ्यास में आ जाता है। मां, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है। हमें समस्या नहीं, समाधान की चर्चा करनी चाहिए, हमें अपने इष्ट से भी प्रार्थना करनी चाहिए जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। कभी-कभी कुछ बच्चे कच्ची उम्र में डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, यह भी चिंता का विषय है। हमारा मूल्य उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके कौशल को विकसित करना, उनको आत्मनिर्भर बनाना है। जैसी भी परिस्थितियां हमारे सामने हैं, उन्हें हमें स्वीकार करना है और जीवन में आगे बढ़ना है।

पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन –

कार्यक्रम के द्वितीय एवं समापन सत्र पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के माध्यम से बनाई गई पेंटिंग की प्रदर्शनी का उद्घाटन अतिथियों द्वारा किया गया। अतिथियों द्वारा प्रदर्शनी की पेंटिंग को विभिन्न स्थानों में पहुंचाने के लिए कहा गया, और कहा कि निश्चित ही इस प्रकार की पेंटिंग प्राकृतिक एवं मूल रूप में है। महाविद्यालय के लिये गौरव का विषय है, अतिथियों ने सभी विद्यार्थियों और महाविद्यालय को साधुवाद दिया। अंत में डाॅ. बालस्वरूप द्विवेदी के द्वारा सभी अतिथियों का आभार प्रर्दशन किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रों. किकास जैन के द्वारा किया गया। चिकित्सा की पढ़ाई हिन्दी में कराने वाला मध्यप्रदेश प्रथम राज्य – मध्यप्रदेश शासन के कार्यक्रम मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी भाषा में हो इसके लिये पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कर कमलों द्वारा कर गया। जिसका सीधा प्रसारण मेकलसुता महाविद्यालय में किया गया, जिसमें महाविद्यालय द्वारा संत रामशरण पुरी जी को आमंत्रित किया गया। महाविद्यालय के समस्त स्टॉफ, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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