जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलहरी का मामला…
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जनपद पंचायत डिंडौरी के ग्राम पंचायत सिलहरी में सरपंच अमर सिंह और प्रभारी सचिव उमाकांत धूमकेती के द्वारा केंद्रीय सहायता राशि में भारी अनियमितता बरते हुए अंधाधुंध नियम विरुद्ध 15 वें वित्त की राशि का भुगतान कर बंदरबांट करने का मामला सामने आया है।
दरअसल ग्राम पंचायत सिलहरी सरपंच, और प्रभारी सचिव के द्वारा 15 वें वित्त की टाईट फंड की राशि का गाईडलाइन के विपरीत मानदेय , किराना समान और अन्य व्यव, फर्जी बिल, बिना प्रयोजन , बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर लाखों रुपए का भुगतान अपने चहेते सप्लायर को मटेरियल खरीदी के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से किया गया है, हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी फर्जी, धुंधले बिल अमान्य फोटो बिलों की जांच करे बिना ही लाखों रुपए का बिल पास कर भुगतान कर दिया गया है।

गाइडलाइन नियमानुसार…
15 वां वित्त की राशि का अन्य ऐसे कार्य जो गैर अनुमत्य ना हों और जो जिला स्तरीय प्लानिंग समिति द्वारा अनुसंशा की जावे कि 15वें वित्त आयोग की अनुसंशा अनुसार किसी भी प्रकार का स्थापना व्यय, वेतन / मानदेय भुगतान, टेंट किराया, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकार्पण समारोह, एयर कंडीशनर, वाहन क्रय, विद्युत बिल, स्वल्पाहार पर व्यय,विज्ञापन / बैनर पर व्यय का भुगतना इस मद से नहीं करने के निर्देश दिए गए है बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
ग्राम पंचायत सिलहरी के ई ग्राम स्वराज में लगे बिलों के अनुसार 2024-25 से 2025- 26 में 15वें वित आयोग के लगभग लाखों रुपयों के बिलों का भुगतान बिना प्रयोजन, बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर सरपंच,सचिव के द्वारा बंदरबाट किया गया है। 15 वें वित्त योजना में प्रावधान है कि सरपंच, सचिव को ग्रामसभा में अनुमोदन कराकर ग्राम पंचायत विकास कार्यक्रम में चयनित कार्य को 60 -40 के रेसियो में कराना होता है। इसके तहत स्वच्छता में 30, शिक्षा में 30, अधो संरचना में 40 प्रतिशत प्लान के तहत केंद्रीय सहायता राशि 15वें वित्त से ग्राम पंचायत का विकास करना होता है, लेकिन जीपीडीपी कुछ बनाते है और खर्च कुछ और कर रहे है।
गांवों के विकास और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय मद के 15वें वित्त की प्राप्त राशि का ग्राम पंचायत सिलहरी में गजब ही घोटाला किया जा रहा है। इस मद के लाखों रुपयों की बंदरबांट सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत के अधिकारी कर रहे है। इस मद की राशि के आहरण की भी गजब तोड़ इस तिकड़ी ने निकाल ली है। मजे की बात यह है कि सरकारी धन हड़पने का ऐसा खेल एक अकेले नहीं या बल्कि पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में चल रहा है। यही वजह है कि अधिकांश सरपंच , सचिव खाक से फलक तक जा पहुंचे है। 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग और आहरण के लिए सरकार की गाइड लाइन के अनुसार यदि किसी को 50 हजार से ऊपर का भुगतान करना है तो उसके लिए तकनीकी स्वीकृति जरूरी होती है। इससे बचने के लिए सरपंच, सचिवों और जनपद के अफसर ने गजब तोड़ निकाल ली है। इस तोड़ के अनुसार 49 हजार, 45 हजार रुपए का आहरण किया जाने लगा है। इस योजना में एक विशेष बात यह भी है कि जीओ टैग जरूरी होता है, लेकिन यहां इस फार्मूले पर भी धता बताया जा रहा है। 50 हजार के नीचे की राशि में न तकनीकी स्वीकृति की आवश्यकता होती है न ही जीओ टैग की। सचिव, सरपंच अपनी मनमानी से मनचाहे हिसाब से खर्च दर्शाकर राशि का गबन कर रहे है।



