दोबारा शिकायत मिलने पर दी एफआईआर की चेतावनी…
अतिरिक्त कलेक्टर ने फीस वापसी का दिया आश्वासन…
डिंडौरी,रामसहाय मर्दन| मापदंडों और नियमों को दरकिनार ताक पर रख झूठ की बुनियाद पर संचालित हो रहे नर्सिंग कॉलेज की एक नई गफलत प्रकाश में आई है। छात्रवृत्ति हड़पने की फिराक में संस्था संचालकों में नर्सिंग विद्यार्थियों के मूल दस्तावेजों को 4 साल से अपने पास बतौर बंधक जमा कर रखा था हालांकि इसकी शिकायत मिलते ही पुलिस कप्तान वाहिनी सिंह ने दो घंटे में छात्रों के मूल दस्तावेज वापस कराये और दोबारा ऐसी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी संस्था संचालक को दी है। इसके साथ ही छात्रों की मांग पर अतिरिक्त कलेक्टर सरोधन सिंह ने इस बाबद पर चिंता जाहिर करते हुए फीस वापसी हेतु आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दस्तावेज मिलने वापस मिलने पर छात्राओं ने खुशी की जाहिर…
बता दे कि दस्तावेज मिलने के बाद छात्राओं ने खुशी जाहिर की है। मिली जानकारी अनुसार जिला मुख्यालय में संचालित जय भारती इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग में अत्यंत छात्राओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत की थी। शिकायत पत्र में उल्लेख है कि संस्था संचालक ने पिछले 4 साल से उनके समस्त मूल शैक्षणिक दस्तावेज जमा कर रखे हैं और वापस मांगने पर नहीं दिए जा रहे हैं। छात्राओं ने परीक्षा आयोजित नहीं होने की दशा में फीस वापसी की मांग भी की है। शिकायत पत्र में छात्राओं ने उल्लेख किया है कि उन्होंने 2021 में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स हेतु नर्सिंग इंस्टिट्यूट में प्रवेश लिया था। प्रवेश के दौरान संस्था संचालक ने उनके सभी मूल दस्तावेज जमा करा लिये थे। शिकायत के मुताबिक संस्था संचालक ने बीएससी नर्सिंग हेतु 70 हजार और जीएनएम कोर्स हेतु 20 हजार फीस जमा कराई थी,जिसकी रसीद छात्राओं के पास सुरक्षित है। आरोप है कि संस्था संचालक ने ड्रेस, एडमीशन, क्लीनिक फीस, पंजीयन सहित अन्य कार्यों हेतु भी अलग से शुल्क बसूल किया था।नर्सिंग छात्राओं ने बतलाया है कि पिछले तीन वर्षों से उनकी वार्षिक परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। जिसके चलते वह मानसिक और आर्थिक रूप से आहत हैं।
किसी और विषय की पढ़ाई करने हेतु जब छात्राओं ने मूल दस्तावेज और फीस वापसी की मांग की तो संस्था संचालक ने इस बाबद आनाकानी जताई।जिसके बाद छात्राओं ने प्रशासन और पुलिस का रुख किया।
भविष्य की चिंता…
शिकायत पत्र में छात्राओं ने उल्लेख किया है कि वह गरीब आदिवासी परिवारों से संबंध रखती हैं और डिंडौरी में किराये के कमरों में तीन वर्षों से रहकर परीक्षा आयोजन का इंतज़ार कर रहे है जिससे उनको आर्थिक हानि भी रही है और भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है। छात्राओं ने निवेदन किया है कि संस्था से उनके हमारे मूल दस्तावेज और फीस वापस कराये जावें।जिससे वह किसी अन्य महाविद्यालय में प्रवेश लेकर अध्ययन कर सकें।
अनुविभागीय अधिकारी ने दी कार्रवाई की चेतावनी….
नर्सिंग विद्यार्थियों की पीड़ा को समझते हुये SP वाहिनी सिंह ने एसडीओपी केके त्रिपाठी को फौरन कार्रवाई के निर्देश दिये,जिसके मद्देनजर एसडीओपी ने संस्था संचालक को तलब करके छात्राओं के सभी दस्तावेज वापस करने की नसीहत थी और भविष्य में ऐसी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।हालांकि इस दौरान संस्था संचालक बहानेबाजी करता रहा,लेकिन पुलिस अधिकारी के सामने उसकी दाल नहीं गल पाई।
एडीएम ने फीस वापसी का दिया भरोसा…
चार साल से बिना परीक्षा आयोजन किये ही पूरी फीस बसूली की शिकायत पर अतिरिक्त कलेक्टर सारोधन सिंह ने ताज्जुब जताया है।उन्होंने शिकायत को गंभीरता से लेते हुये जांच की बात कही है और फीस वापसी का भरोसा भी नर्सिंग छात्राओं को दिया है।
ये रहा पूरा मामला...
गौरतलब है कि न्यायालय और सीबीआई जांच के बीच जिला मुख्यालय में ही तीन नर्सिंग कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसिल की मान्यता के बिना ही धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मान्यता नहीं होने से यहां नामांकित छात्रों की परीक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। मोटी फीस और छात्रवृत्ति के फेर में संचालक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। नर्सिंग कॉलेजों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इनका मान्यता भी रद्द कर दी गई है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। गड़बड़ी सामने आने के बाद इन कॉलेजों में नामांकित नर्सिंग छात्र पिछले तीन साल से परीक्षा नहीं दे पाए हैं। सत्र 2020-21 में प्रवेश लेने वाले छात्रों की प्रथम वर्ष की परीक्षा भी अभी तक नहीं हो पाई हैं। जिले में संचालित नर्सिंग कॉलेज में जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी का 3 साल और बीएससी नर्सिंग के 4 साल के पाठ्यक्रमों में हजारों आदिवासी बच्चे अध्ययनरत हैं। यह सभी विद्यार्थी कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और नियमो की अनदेखी के चलते परीक्षा से वंचित हैं।एक ही भवन में अनेक पाठ्यक्रम, किराये के कमरों में कक्षा संचालन, प्रयोगशाला का स्थित नहीं होने सहित अयोग्य व्यख्याताओं के भरोसे नर्सिंग संस्थान का संचालन होने से इन संस्थाओं की मान्यता अटकी पड़ी है।

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