धीरज ने रखा धैर्य, अभिलाष की राह अभी भी कठिन..?

धीरज ने रखा धैर्य, अभिलाष की राह अभी भी कठिन..?

जबलपुर (नवनीत दुबे) – मध्य प्रदेश के संस्कारधानी के नाम से प्रख्यात जबलपुर में वैसे तो चारो विधानसभाओं में रोचक मुकाबला पर सबकी नजर उत्तर मध्य विधानसभा पर टिकी हुई है, जहाँ टिकिट वितरण में पूर्व युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडे को मैदान में उतारने के बाद स्थानीय कार्यक्रताओं में असंतोष व्याप्त हो गया, परिणति स्वरूप संभागीय भाजपा कार्यालय में जो हुआ सर्वविदित है, मुद्दे की बात पर आते है अभिलाष को प्रत्याशी बनाय जाने के बाद पांडे जी के विरोध में भाजपाई कार्यकर्ताओं के साथ ही पर्दे के पीछे से प्रबल दावेदारी जताने वाले भी लुक चुप तरीके से कसमसाय मन से प्रदेश नेतृत्व से कुंठा का भाव प्रदर्शित कर रहे थे, लेकिन सबसे अहम ओर प्रबल दावेदार धीरज पटेरिया का नाम अलग होने से मानो सियासती भूचाल आ गया हो, धीरज के साथ हुई इस नाइंसाफी को लेकर प्रदेश अध्यक्ष बी.डी. शर्मा के विरोध में आवाज मुखर होने लगी थी, कयास ये लगाये जा रहे थे कि धीरज कहीं फिर से निर्दलीय ताल ठोंक कर समीकरण ना बिगाड़ दे, क्योंकि उत्तर मध्य ही नहीं सारे संस्कारधानी में धीरज पटेरिया का खास जनाधार है ओर इनकी टिकिट कटने से आक्रोश का माहौल बन रहा है, विरोध की आग की ये लपटे जब आलाकमान तक पहुंची तो आनन—फानन में समूचे तारतम्य को जोड़ते हुए धीरज को साधने स्वयं ग्रहमंत्री अमित शाह जबलपुर आये ओर श्री शाह और श्री पटेरिया के बीच निजी मन्त्रणा हुई जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हुई की धीरज आलाकमान की बात और भाजपा के प्रति निष्ठा समर्पण को अग्रणी रखते हुए निर्दलीय के रूप में मैदान में नहीं उतरेंगे, हालांकि ऐसी स्थिति में ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि धीरज के पार्टी हित में लिए गए इस निर्णय से अभिलाष ने राहत की सांस ली होगी, ऐसा हो भी क्यों ना पश्चिम विधानसभा में अपनी जड़ मजबूत कर चुके अभिलाष को एकाएक उत्तर मध्य से दावेदारी मिलना एक चुनोती ही है तो वहीं सूत्रों की माने तो प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा जी के बेहद करीबी माने जाने वाले अभिलाष के साथ ही शर्मा जी के लिए भी अभिलाष की जीत प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है? तो वहीं जब धीरज पटेरिया ने धैर्य रख कर पार्टी की नीति रीति को सर्वोपरि रखा इसके बाद भी उत्तर मध्य में वर्तमान कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना की पांच वर्षों की मजबूत पकड़ व आम जन में छवि तो भाजपाई दावेदार के लिए चुनाव जीतने में बाधक बनेगी तो सबसे अहम पहलू के उत्तर मध्य के भाजपाई पदाधिकारी व कार्यकर्ता बाहरी मन से या भीतरी मन से अभिलाष का साथ दे रहे है, ये स्थिति संस्कारधानी में चर्चा का विषय बनी हुई है, अंततः देश के गृह मंत्री व भाजपा के आलाकमान अमित शाह जी से धीरज की 5 मिनिट की बन्द कमरे में वार्ता भविषयतः एक बड़ा संकेत दे रही है जो संस्कारधानी वासियों के लिए संभवतः मनन चेष्टा को जल्द ही प्रदर्शित हो सकता है?

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