जबलपुर (नबनीत दुबे)। लोकतंत्र के महापर्व माने जाने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थी, ओर उम्मीद यही की जा रही थी कि चुनावी भगवान मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य का फ़ैसला अपना मत देकर करेंगे। सर्वविदित है कि क्रमबद्ध चरणों मे हो रहे लोकसभा चुनाव में आज प्रथम चरण का मतदान मध्यप्रदेश में संपन्न हुआ जिसमें संस्कारधानी जबलपुर के मतदाताओं ने भी लोकसभा चुनाव की यज्ञ बेदी में आहुति दी, मुद्दे की बात पर आते है जिस तरह का अनुमान लगाया जा रहा था कि मतदान का प्रतिशत कम से कम 70 प्रतिशत तो होगा ही किंतु जो हुआ अनुमान के विपरीत ही हुआ मतदान का प्रतिशत 54 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गया। अधिकांश मतदान केंद्र खाली ही दिखे इक्का दुक्का लोग ही बूथों के अंदर नजर आए हालांकि जिस तरह से सुबह 7 से 11 बजे तक मतदान स्थलों पर भीड़ थी उसे देखकर अच्छा मतदान होने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे घड़ी का कांटा आगे बढ़ता गया मतदान स्थलों पर मतदाताओं की उपस्थिति भी कम होती गई? सोचनीय विषय है कि आखिर इस बार लोकसभा चुनाव में मतदाताओं की रुचि कम क्यो हो गई, चर्चाओं का बाजार के चटकारो की माने तो बात ये है कि सर्वप्रथम तो चिन्ह-चिन्ह के पर्ची बांटी गई और अधिकांश मतदाताओं को पर्ची ही नहीं मिली, साथ ही कई मतदाता तो वोटर लिस्ट में अपना नाम खोजते नजर आए और नाम न होने की स्थिति में मायूस होकर घर लौट गए, तो वहीं ये भी कहा जा रहा है कि सबको पता है कि भाजपा की ही विजय होनी है तो फिर क्यो चिलचिलाती धूप में पसीने से तरबतर होकर मतदान किया जाये? कहा तो ये भी गया कि मोदी जी का मतदान के दिन जबलपुर आना भले 5 मिनिट के लिए, वो भी किसी न किसी चुनावी रणनीति का ही प्रमुख खेल हो सकता है? खैर जितने मुह उतनी बातें, खैर वास्तविकता जो भी हो लेकिन मतदान प्रतिशत में इतनी कमी मतदाताओं के मन मस्तिष्क में चल रही मनोवृति का सूचक है और मतदाताओं की नीरसता चिंतनीय ओर विचारणीय है? अंततः ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि अबकी बार 400 पार का शंखनाद करने वाली भाजपा को अखण्ड विश्वास है कि जबलपुर ही क्या समूचे मध्यप्रदेश सहित अधिकांश लोकसभा सीटों पर भाजपा की ही विजयी पताका लहरायेगी ओर प्रभु राम का नाम और अयोध्या धाम मोदी जी का एक बार फिर गुणगान गुंजायमान होगा।

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