साईडलुक, सत्यजीत यादव। टीएन शेषन (1932–2019) भारतीय प्रशासनिक सेवा के वर्ष 1955 बैच के अधिकारी थे, जिन्होंने वर्ष 1990 से वर्ष 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के रूप में कार्य किया। उनका कार्यकाल भारतीय चुनाव प्रणाली में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक बना। उन्होंने चुनाव आयोग को एक निष्क्रिय संस्था से एक सक्रिय और सशक्त निकाय में रूपांतरित किया, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध था।
कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ
उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं कि उन्होंने आचार संहिता का सख्ती से पालन करवाया। शेषन ने चुनाव आचार संहिता को केवल एक दस्तावेज़ से अधिक माना और इसे सख्ती से लागू किया। उन्होंने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को इसके उल्लंघन पर दंडित किया, जिससे चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित हुई।
मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत
उन्होंने मतदाता पहचान पत्र की अनिवार्यता पर जोर दिया। सरकार की अनिच्छा के बावजूद, उन्होंने घोषणा की कि यदि पहचान पत्र जारी नहीं किए गए, तो चुनाव नहीं होंगे। इस दबाव के परिणामस्वरूप, सरकार ने पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की।
चुनाव खर्च पर नियंत्रण
शेषन ने उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की निगरानी के लिए कड़े नियम लागू किए। उन्होंने उम्मीदवारों को अपने खर्च का सटीक लेखा-जोखा प्रस्तुत करने और निर्धारित सीमा के भीतर रहने के लिए बाध्य किया।
बूथ कैप्चरिंग और हिंसा पर रोक
उन्होंने बूथ कैप्चरिंग और चुनावी हिंसा को रोकने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती और प्रशासनिक अधिकारियों के स्थानांतरण जैसे कठोर कदम उठाए।
रोचक घटनाएँ और किस्से
वर्ष 1995 में बिहार चुनाव बैलेट पेपर से ही चुनाव हुआ करता था और बिहार चुनाव को लेकर बदनाम था। ऐसे में बिहार में व्यापक बूथ कैप्चरिंग और हिंसा के बीच, शेषन ने केंद्रीय बलों की तैनाती और अधिकारियों के स्थानांतरण जैसे कठोर कदम उठाए, जिससे चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित हुई।
दूसरी घटना तमिलनाडु में चुनावी हिंसा
वर्ष 1993 में तमिलनाडु में चुनावी हिंसा के दौरान, शेषन ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया, जिसे गृह मंत्रालय ने अस्वीकार कर दिया। शेषन ने चुनावों को स्थगित करने की धमकी दी, उन्होंने 17 पेज का आदेश जारी कर ऐलान कर दिया कि देश में कोई चुनाव तब तक नहीं होगा जब तक सरकार आयोग की शक्तियों को मान्यता नहीं देगी। जिससे मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शेषन की विरासत
आज, जब लोकतंत्र की संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं, शेषन की विरासत एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने दिखाया कि एक दृढ़ प्रशासक कैसे प्रणाली में सुधार ला सकता है। टीएन शेषन ने भारतीय चुनाव प्रणाली को सशक्त और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी निडरता, प्रतिबद्धता और सुधारात्मक दृष्टिकोण आज भी प्रशासकों और नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
( TN Seshan was the pioneer of reforming the Indian electoral system. The Election Commission has transformed from a passive institution to an active and political body. )
Story By: Satyajeet Yadav

