डिण्डौरी:- वनग्राम खपरी पानी एंव खमेरा में सामुदायिक वनाधिकार पटटा की संवैधानिक कार्रवाई को लेकर हुई ग्रामसभाऐं….

डिण्डौरी:- वनग्राम खपरी पानी एंव खमेरा में सामुदायिक वनाधिकार पटटा की संवैधानिक कार्रवाई को लेकर हुई ग्रामसभाऐं….

◆ 18 वर्ष कानून लागू हुए लेकिन सामुदायिक वनाधिकार का पटटा 99 प्रतिशत ग्रामों को उपलब्ध नहीं:-

डिण्डौरी(रामसहाय मर्दन)| विकासखण्ड बजाग अंतर्गत वन ग्राम खपरी पानी एंव खमेरा में ग्रामवासियों ने पारंपरिक सामुदायिक वनाधिकार का पटटा प्राप्त करने सभा आयोजित की ग्राम में रूढ़ीजन्य आदिवासी पारंपरिक ग्रामसभा के प्रदेश समन्वयक हरी सिंह मरावी ने उपस्थित ग्रामवासियों को पारंपरिक सामुदायिक वनाधिकार का पटटा प्राप्त करने की कार्यवाही से अवगत कराया उन्होने बताया कि भारत की संसद ने जंगल पर आश्रित और निवास करने वाले अपने नागरिको पर अब तक हुए ऐतिहासिक अन्यायों को खत्म कर उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का आष्वासन वनाधिकार कानून के माध्यम से दिया था। लेकिन वनाधिकार कानून 2006 से लेकर 2022 तक जिले मे पूर्ण रूप से क्रियान्यवयन नहीं हो पाया है, इस कानून में चार हेक्टेयर तक काबिज भूमि का पटटा दिया जाना था लेकिन हितग्राहियों को कुल काबिज भूमि का पटटा ना देकर आधा एकड़ एक एकड़ आदि का अधिकांषतः पटटा दिया गया है, म.प्र. एंव जिला प्रषासन से ग्रामवासियों ने मांग की है कि काबिज वनभूमि का कानून के अंतर्गत पटटा दिया जावे। हरी सिंह मरावी ने बताया कि वनाधिकार कानून 2006 की धारा 3(1) ख,ग,घ,ड़, में उल्लेखित अधिकारों के लिए सामुदायिक वन अधिकार पत्र दिए जाने का प्रावधान किया गया है, भारत सरकार ने 06 सितम्बर 2012 को राजपत्र में प्रकाषित अधिसूचना के अनुसार सामुदायिक वनाधिकारों के बारे मे संषोधन भी किए। लेकिन मात्र दस्तावेजों में सामुदायिक वन अधिकार पत्र दिये गए, जिन ग्रामों को सामुदायिक वन अधिकार पत्र मिल गए है वे भी त्रुटिपूर्ण है, वे भी हितग्राहियों को दिए गए भू अधिकार पत्रक की तरह ही है। सामुदायिक वनाधिकार अन्र्तगत वन अधिकार कानून 2006 की धारा 3(1) (ड़ )के अनुसार विषेष पिछड़ी जनजाति समूहो की बसाहटों के हेबिटेट राईटस (प्राकृतिक एंव पर्यावास) का अधिकार (हक) पत्र दिया जाना है लेकिन अभी तक बैगाचक क्षेत्र के ग्रामों को ये अधिकार नहीं दिए गए है।

◆ वनग्रामों का राजस्व ग्रामों मेें परिवर्तन:-

मध्यप्रदेश शासन ने लगातार जन संगठनों की मांग के आधार पर वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तन करने का आदेश दिया है, वन अमला वनग्रामों में वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तन करने ग्रामसभा का प्रस्ताव सहमति मांगा जा रहा है। लेकिन ग्रामवासियों की मांग है कि वन अधिकार अधिनियम के तहत ग्रामवासियों को पूर्ण अधिकार दिया जावे और ग्राम की सामुदायिक पारंपरिक ग्रामसभा की सीमा का निर्धारण कर सामुदायिक वन अधिकार दिया जावे और फिर वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तन किया जावे। जिससे कानून का परिपालन पूर्ण हो सके और लोगों को हक अधिकार की प्राप्ति हो सके। सभा में गोपतपुर सरंपच महेन्द्र सिंह परस्ते, पूर्व सरपंच लाखों अषोक धुर्वे और स्थानीय कार्यकर्ता पीताम्बर खैरवार एंव खपरीपानी, खमेरा के ग्राम के ग्रामवासियों के साथ ही ग्राम मुखिया मुकददम दवान आदि बैगा समुदाय के उपस्थित हुए। खमेरा की सभा में वन विभाग के कर्मचारी बीटगार्ड डिप्टी रेंजर आदि भी उपस्थित हुए हरी सिंह मरावी ने कहा कि संविधान और कानून के तहत ही लोगों को हक और अधिकार मिले, मरावी ने ग्रामवासियों से अपील की कि किसी भी तरह लोगों के बहकावें में ना आवें किसी प्रकार का असंवैधानिक संघर्ष ना करें।

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