हिंदू धर्म में मां दुर्गा का रूप माना जाता है कन्याओं को….
शहपुरा मानिकपुर क्षेत्र में नवमी तिथि के दिन जगह-जगह हुआ कन्या भोज का आयोजन….
डिंडौरी/शहपुरा| नवरात्रि के नवमें दिन देवी मंदिरों सहित भक्तों ने अपने घर पर कन्या भोज का आयोजन किया। इस दौरान विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना के बाद कन्याओं को भोजन कराया गया और उनसे आर्शीवाद भी लिया। वहीं नवरात्र के अंतिम दिन माता स्वरूपा कन्याओं की पूजा-अर्चना कर उन्हें भोजन कराने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जिसके चलते सोमवार को घर-घर में माता के भक्तों ने कन्या भोज का आयोजन किया ,एवं हवन पूजन किया गया, साथ ही देवी मंदिरों में भंडारा का आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त पहुंच कर प्रसाद ग्रहण किया। नवरात्र के अंतिम दिन सोमवार को शहपुरा मानिकपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों में कन्याभोज व भंडारे का आयोजन किया गया। जहां सुबह से ही लोग कन्याओं को अपने घर पर बुलाकर पहले उनके पांव पखारे फिर चूड़ी, बिंदी, महावर, चुनरी ओढ़कर देवी के समान श्रृंगार व आरती के बाद खीर पूड़ी सब्जी मिठाई हलवा जैसे पकवान खिलाएं नन्हीं कन्याओं की पूजा करते हुए सुख समृद्धि की आशीर्वाद मांगा इसके साथ ही माता को तरह-तरह के व्यंजन व पकवानों का भोग लगाया गया एवं हवन पूजन किया गया, दुर्गा मंदिर एवं विभिन्न मंदिरों में अठवाई व चुनरी चढ़कर आदर पूर्वक उनको भोजन कराया गया। नवरात्र के नौ दिनों तक कन्याओं में माता का स्वरूप देखा जाता है।
इसी परंपरा के अनुसार नवरात्र के अंतिम दिन कन्या भोज कराया जाता है। साथ ही नौ दिनों तक माता का व्रत रखने वाले भक्त कन्या भेाज के बाद अपना व्रत तोड़ा। साथ ही कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनका सबसे पहले पांव पखारा गया फिर आदर पूर्वक भोजन कराने के बाद उनको उपहार स्वरूप श्रृंगार का सामान सहित रुपए देकर उनका विदाई किया गया।

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डिंडौरी/शहपुरा| नवरात्रि के नवमें दिन देवी मंदिरों सहित भक्तों ने अपने घर पर कन्या भोज का आयोजन किया। इस दौरान विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना के बाद कन्याओं को भोजन कराया गया और उनसे आर्शीवाद भी लिया। वहीं नवरात्र के अंतिम दिन माता स्वरूपा कन्याओं की पूजा-अर्चना कर उन्हें भोजन कराने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जिसके चलते सोमवार को घर-घर में माता के भक्तों ने कन्या भोज का आयोजन किया ,एवं हवन पूजन किया गया, साथ ही देवी मंदिरों में भंडारा का आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त पहुंच कर प्रसाद ग्रहण किया। नवरात्र के अंतिम दिन सोमवार को शहपुरा मानिकपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों में कन्याभोज व भंडारे का आयोजन किया गया। जहां सुबह से ही लोग कन्याओं को अपने घर पर बुलाकर पहले उनके पांव पखारे फिर चूड़ी, बिंदी, महावर, चुनरी ओढ़कर देवी के समान श्रृंगार व आरती के बाद खीर पूड़ी सब्जी मिठाई हलवा जैसे पकवान खिलाएं नन्हीं कन्याओं की पूजा करते हुए सुख समृद्धि की आशीर्वाद मांगा इसके साथ ही माता को तरह-तरह के व्यंजन व पकवानों का भोग लगाया गया एवं हवन पूजन किया गया, दुर्गा मंदिर एवं विभिन्न मंदिरों में अठवाई व चुनरी चढ़कर आदर पूर्वक उनको भोजन कराया गया। नवरात्र के नौ दिनों तक कन्याओं में माता का स्वरूप देखा जाता है।इसी परंपरा के अनुसार नवरात्र के अंतिम दिन कन्या भोज कराया जाता है। साथ ही नौ दिनों तक माता का व्रत रखने वाले भक्त कन्या भेाज के बाद अपना व्रत तोड़ा। साथ ही कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनका सबसे पहले पांव पखारा गया फिर आदर पूर्वक भोजन कराने के बाद उनको उपहार स्वरूप श्रृंगार का सामान सहित रुपए देकर उनका विदाई किया गया।


