एम. आई. सी. के गठन पर घिरे जगत बहादुर?
जबलपुर (नवनीत दुबे)। सर्व विदित है संस्कारधानी में एक लंबे अरसे के बाद कांग्रेस की नगर सत्ता स्थापित हुई है जिसके महापौर जगत बहादुर सिंह हैं हाल ही में लंबे इंतजार के बाद मेयर इन काउंसिल का गठन हुआ बस फिर क्या था, कांग्रेसियों की तरकस से जुबानी तीर अन्नू सिंह पर प्रहार के लिए छूटने लगे, आरोप लगाया जा रहा है कि मेयर इन काउंसिल के गठन में चिन्ह चिन्ह के रेवड़ी बांटी गई है और यह रेवडी वितरण में अहम निर्धारण की भूमिका निभाने वाले पश्चिम विधानसभा के कांग्रेस विधायक तरुण भनोट हैं? कांग्रेसियों का क्रोध इतना उबाल पर है कि वह यह भी कहने से परहेज नहीं कर रहे की महापौर जगत बहादुर सिर्फ चेहरा है पर्दे के पीछे से पूरी रूपरेखा और सियासी खेल कोई और खेल रहा है, जिसके कर हस्त के चलते अनु सिंह सियासत में आगे बढ़े हैं,? यह घटनाक्रम को जाना पहचाना सा प्रतीत हो रहा है जैसे पूर्व में स्थापित भाजपा नगर सत्ता में कहने को तो महापौर स्वाति गोडबोले थी लेकिन पूरी रूपरेखा का संचालन पर्दे के पीछे से होता था, शहर जाहिर है कि भाजपा नगर सत्ता के कार्यकाल में महापौर पति अहम और निर्णायक की भूमिका का निर्वहन करते थे ? खेत मुद्दे की बात पर आते हैं नगर सत्ता के वर्तमान मुखिया जहां एक और अपनी जीत का जश्न अभी तक स्वागत सभाओ ,आयोजनों, में मना रहे थे पर एकाएक विजय कांग्रेसी पार्षद व कांग्रेस के विधायकों की वक्र दृष्टि का शिकार बन रहे हैं, चर्चा है कि एमआईसी गठन में पूर्व, उत्तर मध्य, कैंट, विधानसभा के विधायकों व कांग्रेसी दिग्गजों की अनदेखी की गई है, यदि जबलपुरिया भाषा में बोला जाए तो भैया चाचा लोगों को अनु सिंह ने बहुत हल्के में ले लिया और एक कठपुतली की भांति किसी व्यक्ति विशेष के इशारे पर नाच रहे हैं ? अन्नू सिंह के सामने बड़े पशोपेश की स्थिति है, सत्ता की बागडोर तो है पर अपनों ने ही संग्राम छेड़ दिया, हालांकि यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा के मेयर इन काउंसिल में जिन पार्षदों को शामिल किया गया है उनमें कुछ नामों को छोड़कर अधिकांश विशेष कांग्रेस विधायक की कृपा पात्र हैं और कुछ एक तो जुआ सट्टा किंग के नाम से भी संस्कारधानी में अपनी पहचान रखते हैं? तो वहीं कुछ एक पेटी कांट्रेक्टर के रूप में जाने जाते हैं जो कद्दावर कांग्रेसी के कृपा पात्र हैं? और कुछ ऐसे चेहरे हैं जिनमें महिला पार्षदों के नाम भी शामिल हूं उन्हें नगर मंत्री तो बना दिया गया पर उनके विभाग का दायित्व क्या है, और उनके कार्य क्या हैं बेचारे खुद नहीं जानते वैसे जानने की जरूरत भी क्या है जिन विधायक जी की कृपा के चलते महापौर ने उन्हें नियुक्त किया है अब वही विधायक जी बताएंगे कि करना क्या है ? खैर जो भी हो पर एक बात तो स्पष्ट हो गई कि बड़ी जद्दोजहद के बाद कांग्रेस पुनः कई वर्षों बाद सत्ता का सिंहासन हासिल कर पाई , वह भी अनु सिंह की व्यक्तिगत छवि के नाम पर लेकिन इस जीत पर या यह कहें कि नगर सत्ता के कार्यकाल के प्रारंभ में ही अपने ही रूठ गए और ग्रहण की काली छाया का हलका प्रतिबिंब अन्नू सिंह के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गया ?
बरगी विधायक की नाराजगी महंगी ना पड़ जाए?
नगर सत्ता में एमआईसी गठन को लेकर मचे घमासान के बीच बरगी विधानसभा के कांग्रेस विधायक संजय यादव की नाराजगी भी जगजाहिर हो गई और यादव जी की हो रही उपेक्षा के चलते उनका दर्द आक्रोश के रूप में फूट पड़ा, श्री यादव ने 1 न्यूज़ चैनल में स्पष्ट तौर पर है बोल दिया कि संस्कारधानी जबलपुर में कुछ कांग्रेसी जो खुद को दिगगज और कद्दावर समझते हैं वह कांग्रेस की नीति नीति का निर्धारण कर रहे हैं जो पूर्णता अनुचित है , साथ ही निकाय चुनाव के प्रारंभ से ही श्री यादव को अनदेखा किया जा रहा है जबकि पश्चिम विधानसभा से राजनीतिक दिग्गजों में इनकी गिनती भी है पर किसी व्यक्ति विशेष के अहंकार के फल स्वरुप महापौर जगत बहादुर ने इनकी अस्मिता को ठेस पहुंचाई है ? तो वहीं कांग्रेस विधायक ने कांग्रेस पार्टी के भविष्य को लेकर भी भविष्यवाणी कर दी, उनका कहना है कि जल्द ही कोई तीसरा विकल्प मध्यप्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत करेगा और उस दिन कांग्रेस पार्टी मध्यप्रदेश में हाशिए पर चली जाएगी और कुछ दिग्गज कांग्रेसी जो खुद को स्वयंभू दर्शा रहे हैं उनका अस्तित्व भी धुमिलता को प्राप्त कर जाएगा ? हालांकि बरगी विधायक संजय यादव ने कांग्रेस पार्टी में हो रहे तिरस्कार और कुछ विशेष लोग जो प्रदेश कांग्रेस आलाकमान के खासम खास, दर्शाते हैं उनकी वर्चस्वता और गुटबाजी की ओर संकेत देते हुए निष्ठावान समर्पित जमीनी कांग्रेसी सिपाहियों की तिरस्कृत पद्धति को जगजाहिर कर दिया, अब ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि संजय यादव जैसे कर्मठ समर्पित कांग्रेस सिपाही की अस्मिता को ताक पर रखना, कांग्रेस को हानि पर साबित हो सकता है, चर्चा तो यह भी है कि संस्कारधानी के कुछ समर्पित कांग्रेस पार्टी के सिपाही पार्टी में हो रही उपेक्षा और तिरस्कार के फल स्वरुप भाजपा का दामन थाम सकते हैं ? और प्रदेश के दिग्गज कद्दावर भाजपाई के संपर्क में हैं अगर ऐसा होता है कि कर्मठ समर्पित कांग्रेस सिपाही चंदा अहंकारी कांग्रेसी दिग्गजों की स्वार्थ पर उपेक्षा के चलते भाजपाई बनते हैं ,तो आगामी विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है !

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