डिंडौरी,रामसहाय मर्दन|कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत सरकारी घर में अवैध रूप से घुसकर मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने और साथ ही दिनांक 21/09/22 को आरोपियों ने कोर्ट के बाहर पुलिस लाइन के पास रास्ता रोककर पीड़ित के साथ मारपीट कर पैसे व जरूरी कागजात छीन लिया गया था,जिसकी शिकायत पीड़ित ने कोतवाली थाने में दर्ज करायी गयी, लेकिन पुलिस द्वारा आरोपी नीलिमा मरकाम, नारायण सिंह, अंजली मरकाम, रामफल धुर्वे, प्रदीप तिवारी, धीरेंद्र मरकाम, यशवंत मरकाम पर पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

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डिंडौरी,रामसहाय मर्दन|कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत सरकारी घर में अवैध रूप से घुसकर मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने और साथ ही दिनांक 21/09/22 को आरोपियों ने कोर्ट के बाहर पुलिस लाइन के पास रास्ता रोककर पीड़ित के साथ मारपीट कर पैसे व जरूरी कागजात छीन लिया गया था,जिसकी शिकायत पीड़ित ने कोतवाली थाने में दर्ज करायी गयी, लेकिन पुलिस द्वारा आरोपी नीलिमा मरकाम, नारायण सिंह, अंजली मरकाम, रामफल धुर्वे, प्रदीप तिवारी, धीरेंद्र मरकाम, यशवंत मरकाम पर पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।पीड़ित के कई लिखित शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई….बताया गया कि पीड़ित द्वारा कई लिखित शिकायतों के बावजूद, प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराधों का खुलासा होने के बावजूद, कोतवाली पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं की गई थी जो निर्धारित प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन था। जिससे असंतुष्ट होकर पीड़ित ने विशेष न्यायालय डिंडौरी की शरण में जाकर शिकायत दायर की है जो वर्तमान में लंबित है व संबंधित न्यायालय द्वारा कार्रवाई शुरू की गई है। हालांकि, पीड़ित का कहना है कि, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोतवाली थाना डिंडौरी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन पेश नहीं किया गया जो विभिन्न सवाल खड़े करता है। जिसके संबंध में पीड़ित द्वारा अपने अधिवक्ता सम्यक् जैन व मनन अग्रवाल के माध्यम से उच्च न्यायालय की शरण ली गई है, जहां से उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय एससी/एसटी (जहां मामला लंबित है) को निर्देशित किया है कि, यदि पुलिस अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट पेश नहीं की गई है, तो विधि पूर्वक दंडात्मक प्रक्रिया अपनाते हुए पुलिस अधिकारियों से जाँच प्रतिवेदन एवं साक्ष्यों को अतिशीघ्र मंगवाएं और मामले में क़ानून अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करे।
पीड़ित के कई लिखित शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई….
बताया गया कि पीड़ित द्वारा कई लिखित शिकायतों के बावजूद, प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराधों का खुलासा होने के बावजूद, कोतवाली पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं की गई थी जो निर्धारित प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन था। जिससे असंतुष्ट होकर पीड़ित ने विशेष न्यायालय डिंडौरी की शरण में जाकर शिकायत दायर की है जो वर्तमान में लंबित है व संबंधित न्यायालय द्वारा कार्रवाई शुरू की गई है। हालांकि, पीड़ित का कहना है कि, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोतवाली थाना डिंडौरी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन पेश नहीं किया गया जो विभिन्न सवाल खड़े करता है। जिसके संबंध में पीड़ित द्वारा अपने अधिवक्ता सम्यक् जैन व मनन अग्रवाल के माध्यम से उच्च न्यायालय की शरण ली गई है, जहां से उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय एससी/एसटी (जहां मामला लंबित है) को निर्देशित किया है कि, यदि पुलिस अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट पेश नहीं की गई है, तो विधि पूर्वक दंडात्मक प्रक्रिया अपनाते हुए पुलिस अधिकारियों से जाँच प्रतिवेदन एवं साक्ष्यों को अतिशीघ्र मंगवाएं और मामले में क़ानून अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करे।


