डिंडौरी,रामसहाय मर्दन। जिले में निजी स्कूलों में बच्चों से मोटी फीस वसूली जाती है, जबकि पढ़ाने वाले कथित शिक्षक अप्रशिक्षित है। कथित शब्द इसलिए क्योंकि पता नहीं , स्कूल संचालकों के रिकॉर्ड के अनुसार वे शिक्षक है भी या नहीं। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यह स्थिति अधिकांश प्राइवेट स्कूलों की है। जिले से लेकर ग्रामीण इलाकों में स्थिति खराब है, जहां अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचते ही नहीं है। प्राइवेट स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षक धड़ल्ले से पढ़ाने के पीछे जिम्मेदार विभाग की उदासीनता है। जिसके चलते बच्चों की भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
शिक्षा अधिकारियों का बेपरवाह, अभिभावक में जागरूकता की कमी…
अभिभावक यदि स्कूल संचालक से यह पूछने लग जाएं कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता क्या है..? तो पोल खुल जाएगी। वहीं शिक्षा अधिकारियों का बेपरवाह होना भी बहुत बड़ा कारण है, जिसके चलते डीईओ या बीईओ यह जांच नहीं करते कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की योग्यता क्या है, और प्रशिक्षित शिक्षक पढ़ाने की एवज में वेतन ज्यादा मांगते हैं। जबकि 10-12 वीं पास कथित शिक्षक 2 से 4 हजार रुपए में आसानी से मिल जाते हैं।
ये है प्रावधान…
ऐसा नहीं कि सभी प्राइवेट स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षक पढ़ा रहे है, कुछ में प्रशिक्षित भी हैं। शिक्षा विभाग के नियमानुसार सरकारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट स्कूलों में भी शिक्षकों की योग्यता का डिप्लोमा करना चाहिए। शिक्षकों की सैलेरी का भुगतान बैंक अकाउंट से करने का प्रावधान है। शायद ही कोई प्राइवेट स्कूल होगा, जहां बोर्ड पर शिक्षकों के नाम, योग्यता और सब्जेक्ट के बारे में लिखा हो। बैंक अकाउंट से सैलेरी का भुगतान भी गिनती के स्कूलों में ही किया जाता है।
सूत्रों का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा विभाग की टीम निरीक्षण के लिए आती है, तो संस्था संचालक किसी दूसरे की वैध डिग्री पेश कर देते है , डिग्री देखकर टीम संतुष्ट हो जाती है।
ये रहा पूरा मामला…
दरअसल मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में लगभग एक सैकड़ा से अधिक निजी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय और 25 उच्च एवं उच्चतर विद्यालय संचालित हैं, निजी विद्यालय के संचालक लम्बे समय से नियमों को दरकिनार कर शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस के तौर पर वसूली जा रही थी,इतना ही नहीं स्कूल संचालको द्वारा पाठ्य पुस्तक, गणवेश का विक्रय स्कूल से ही किए जाने के मामले भी सामने आ रहें थे, शिक्षा को बाजार बना अधिक से अधिक कमाई करने की मंशा से कम वेतन में अप्रशिक्षत शिक्षकों से निजी विद्यालयों में शिक्षक के पद पर कार्य कराया जा रहा है।
निजी स्कूलों की मध्यप्रदेश निजी विद्यालय नियम (फीस तथा संबंधित विषयो का विनियम 2020) के तहत संचालित निजी स्कूल संचालको के मनमानी फीस वसूली सहित स्कूल प्रबंधन द्वारा बरती जा रही लापरवाही पर अंकुश लगाने जिला प्रशासन द्वारा समस्त विद्यालयों की जांच करने के आदेश जारी किए गए थे,लेकिन समय गुजरने के साथ ही जिला प्रशासन ने जाँच और कार्रवाई की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया हैं, वही अभिभावकों को प्रशासन से काफ़ी उम्मीदें थी की अवैध तरीके से वसूले गए फीस उन्हें वापस मिलेगा लेकिन कार्रवाई थमने से अब अभिभावक निराश हैं।
11 निजी विद्यालयों के विरुद्ध 2-2 लाख रु का जुर्माना अधिरोपित….
जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में गठित जाँच समिति द्वारा जिले की 14 निजी विद्यालयों की जांच निर्धारित पैमाने के आधार पर किया गया हैं, उन प्रकरणों पर कार्रवाई हेतु एसडीएम डिंडौरी द्वारा कलेक्टर को फ़ाइल भेजा गया था, जिनमे से 11 स्कूलो के विरुद्ध तत्कालीन कलेक्टर विकास मिश्रा ने 2- 2 लाख रूपये का जुर्माना अधिरोपित करते हुए अवैध तरीके से वसूले गए फीस वापस करने के आदेश पारित किए थे, लेकिन अब तक 07 विद्यालय जे डी ई एस जूनवानी, माँ नर्मदा ज्ञान ज्योति डिंडोरी, सेंट ऐंजिल पब्लिक स्कूल डिंडोरी, मदर टेरेसा स्कूल डिंडोरी, एमएसजी समनापुर, सरस्वती ज्ञान मंदिर बिछिया, मदर टेरेसा शहपुरा के द्वारा संचालको ने अधिरोपित जुर्माना अदा किया हैं, वही जे डी ई एस दुल्लोपुर, राजुषा हायर सेकेण्डरी स्कूल, किइंडर गार्डन पब्लिक स्कूल, जे आर आर कान्वेंट बिछिया द्वारा जुर्माना कि राशि अदा नहीं कि गईं है।
जाँच में मिली थी बड़ी खामियाँ…
जाँच समिति द्वारा आरटीई, पाठय पुस्तक, गणवेश, शिक्षकों की जानकारी, भवन, फीस एवं खाता, फीस वृद्धि, सहित डीपीआई पोर्टल में किए गए एंट्री को लेकर गहनता से जाँच किया जा रहा था, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़िया उजागर हुई थी, जिला प्रशासन द्वारा जाँच में गड़बड़िया उजागर होने तथा कलेक्टर के समक्ष फ़ाइल प्रस्तुत किए जाने के बावजूद कुछ विद्यालयों पर कार्रवाई नहीं किया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।



