डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। मध्यप्रदेश सरकार के लोकशिक्षण संचालनालय द्वारा प्रदेश के शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब शिक्षकों की उपस्थिति “हमारे शिक्षक” मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह उपस्थिति शाला के निर्धारित लोकेशन पर चेहरा दिखाकर सेल्फी के माध्यम से दर्ज करनी होगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ऐप पर उपस्थिति दर्ज होने के उपरांत ही वेतन जनरेट किया जाएगा। साथ ही आगामी एक जुलाई से नियुक्त किए जाने वाले अतिथि शिक्षकों को भी इस एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। उपस्थिति का पूरा डेटा “एजुकेशन पोर्टल 3.0” से लिंक रहेगा और वेतन भुगतान भी इसी आधार पर होगा।
इस आदेश को लेकर शासकीय शिक्षक संगठन में विरोध के सुर तेज हो गए हैं। डिंडौरी जिला शासकीय शिक्षक संगठन के अध्यक्ष रामकुमार गर्ग ने इस व्यवस्था को अव्यवहारिक और शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश केवल शिक्षा विभाग पर लागू किया गया है, जबकि जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों पर ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं होती। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर निगरानी की यह प्रणाली थोपना अनुचित है।
रामकुमार गर्ग ने कहा, “अगर सरकार को यह व्यवस्था लागू करनी है तो सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इसे लागू करे। सिर्फ शिक्षकों को निशाना बनाना, उनके कार्य पर संदेह करना और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना है।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गाँवों में कई दिनों तक बिजली गुल रहती है, नेटवर्क की समस्या बनी रहती है, और अनेक स्कूलों में शिक्षक आवास तक नहीं हैं। ऐसे में इस व्यवस्था को कैसे व्यवहार में लाया जाएगा? शिक्षक संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक ऐसी निगरानी आधारित व्यवस्था का विरोध जारी रहेगा।



