मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में क्षमावाणी पर्व का आयोजन अमरकंटक रोड स्थित कुतरेल नदी (टांकी नाला) के पास नव निर्मित रिसोर्ट में किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के लोगों ने बड़े उत्साह और श्रद्धा से सहभागिता की।
क्षमावाणी पर्व पर समाज के लोग एक-दूसरे से क्षमा मांगते और दूसरों को क्षमा करते हैं। “मिच्छामि दुक्कड़म” कहकर लोग अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुए अपराध और दोषों के लिए क्षमा याचना करते हैं। यह पर्व आत्म-शुद्धि और आत्म-विकास का संदेश देने के साथ-साथ रिश्तों में सुधार और मेल-मिलाप को भी बढ़ावा देता है। आयोजन के दौरान विभिन्न खेल, भजन, नृत्य का आयोजन किया गया। साथ ही पर्यूषण पर्व पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया तथा वरिष्ठ जनों का सम्मान भी किया गया।
इसके साथ ही दस लक्षण पर्व के अवसर पर जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। जैन मुनि एवं विद्वानों द्वारा धर्म के दस लक्षणों पर प्रवचन हुए। अनंत चतुर्दशी के दिन नगर में भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महिलाएं गरबा और नृत्य करते हुए शामिल हुईं।
दस लक्षण पर्व का महत्व
दस लक्षण पर्व जैन धर्म का प्रमुख उत्सव है जो आत्म-शुद्धि और आत्म-विकास के लिए मनाया जाता है। इस पर्व में क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, अक्रोध, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे दस लक्षणों का पालन किया जाता है। यह पर्व जैन समाज की एकता और धार्मिक समर्पण का प्रतीक है।

