पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना पर मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों पर उठे सवाल, उप मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा कर संगठन ने रखी प्रमुख माँगें
साईडलुक, जबलपुर। मध्यप्रदेश के पत्रकारों की चिंताओं को आवाज़ देते हुए कलमवीर संघर्ष संगठन ने राज्य सरकार से पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना पर लगने वाले 18% जीएसटी को तुरंत हटाने की मांग की है। संगठन का मानना है कि यह कर दर पत्रकारों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ रही है और यह उनकी कठिन परिस्थितियों को और जटिल बना रही है।
राष्ट्रीय संरक्षक गिरीश पांडे और राष्ट्रीय अध्यक्ष मयंक तिवारी ने बताया कि देशभर में अधिकांश बीमा योजनाएं जीएसटी से बाहर रखी गई हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मध्यप्रदेश में पत्रकारों की स्वास्थ्य बीमा योजना पर अब भी 18% जीएसटी वसूला जा रहा है। इसे पत्रकार विरोधी कदम बताया गया है। मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा इसकी अंतिम तिथी 22 सितम्बर रखी गई है, जिसे आगे बढ़ाई जाये, और इस वर्ष प्रीमियम की राशी पिछले वर्ष की अपेक्षा में बढ़ा दी गई है। जिसे पिछले वर्ष की तरह ही रखी जाए।
इस मुद्दे को लेकर संगठन के प्रतिनिधियों ने राज्य के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से फोन पर चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा का आश्वासन दिया और कहा कि पत्रकारों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी।
प्रदेश संरक्षक सुनील साहु व प्रदेश अध्यक्ष शुभम् शुक्ला एवं संगठन के पदाधिकारियों ने चेताया कि यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में पत्रकार आंदोलन शुरू किया जाएगा। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बोझ तले दबाना, राष्ट्रहित में नहीं, अब समय है कि सरकार पत्रकारों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर त्वरित राहत दे।
संगठन के विवेक यादव, संजय साहु, विनोद मिश्रा, योगेश सोनी, सुधीर खरे, सत्यजीत यादव, हर्षित चौरसिया, जिला अध्यक्ष सृजन शुक्ला, रघुनंदन शुक्ला, राहुल पाण्डे, फतेह सिंह गुल्लु, ओमप्रकाश पाल, अनुप राबिन आदि ने इस विषय में जल्द उचित कदम उठाने प्रदेश सरकार से मांग की है।
संगठन ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं:
1. पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना से 18% जीएसटी को हटाया जाए।
2. बीमा प्रीमियम की राशि कम की जाए, ताकि अधिक पत्रकार इसका लाभ ले सकें।
3. फॉर्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, जिससे सभी योग्य पत्रकार आवेदन कर सकें।

