डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| वैसे तो तय मापदंड को ताक में रखकर निर्माण कार्यों को करना जिम्मेदारों के लिए आम बात हो गई। कहना गलत नहीं होगा कि उच्च अधिकारियों की लापरवाही इसकी बड़ी वजह है। चाहे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा हो या ग्राम पंचायत निर्माण ऐजेंसी नियमों खुलकर अवहेलना किया जा रहा है। मामले को लेकर आए दिन खबरों में सुर्खियां बटोरते है, और जिम्मेदारों के द्वारा इनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
एक्शन मोड पर कलेक्टर नेहा मारव्या….
दरअसल मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर नेहा मारव्या ने एक्शन लिया और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और ग्राम पंचायत निर्माण ऐजेंसी सूचना पटल में 15 दिनों भीतर जानकारी अकिंत कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पत्र किया जारी किया गया है, जिसमें उल्लेख किया गया कि जिले के भ्रमण के दौरान प्रायः देखा गया है कि निर्माण कार्य स्थल में निर्माण संबंधी जानकारी प्रदर्शित किये जाने वाले पटल को या तो अधूरा प्रदर्शित किया जा रहा है अथवा प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है।
कलेक्टर नेहा मारव्या ने पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है कि जिन निर्माण कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा डिण्डौरी या ग्राम पंचायत निर्माण ऐजेंसी हों ऐसे समस्त निर्माण स्थलों में निर्माण संबंधी जानकारी (कार्य का नाम, तकनीकी/प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक एवं राशि, निर्माण ऐजेंसी, लागत, कार्य प्रारंभ एवं समाप्ति दिनांक आदि) 15 दिवस में अंकित कराया जाकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
आखिर क्यों जिम्मेदारों के द्वारा की जा रही नियमों की अनदेखी…
शासन के निर्देशानुसार कोई भी निर्माण कार्य प्रारंभ कराने से पहले निर्माण स्थल में सूचना पटल पर संबंधित निर्माण कार्य की जानकारी लिखना अनिवार्य है। किंतु जिम्मेदारों के द्वारा शासन के दिशा- निर्देशों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही रहे है। निर्माण स्थल में सूचना पटल नहीं होने के कारण ग्राम के आमजनों समेत अन्य लोंगो को निर्माण कार्य की लागत एवं मद समेत अन्य जानकारी नहीं मिल पा रही है। अखिर क्या कारण के उपयंत्री समेत ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों के द्वारा जानकारी छुपाया जा रहा है। अब आगे देखना यह होगा कि कलेक्टर नेहा मारव्या के द्वारा जारी पत्र पर जिम्मेदारों के द्वारा कितना पालन किया जा है या फिर यूं ही नियमों की अनदेखी चलती रहेगी…?



