साईडलुक, (नवनीत दुबे)। इन दिनों भाजपा के जिम्मेदार ओर पदासीन माननीयों की सियासती जुबान से निकलने वाले शब्द इनकी वाकपटुता ओर हिंदुस्तान विरोधी विधर्मियो के प्रति स्नेह भाव, इनकी मनन स्थिति को प्रदर्शित कर भारतीय सेना के साथ ही हर सच्चे देशभक्त हिंदुस्तानी को ये सोचने विवश कर रहा है, कि इतने अनुभवी ओर वरिष्ठ होने के बाद भी हिंदुस्तान विरोधियों को किस भाषा मे संबोधित करना चाहिए? मुद्दे की बात पर आते है बीते दिन मध्यप्रदेश के डिंडोरी में भाजपा के मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी दर्शाते नजर आए ऑपरेशन सिंदूर के सम्बंध में चर्चा के दौरान उन्होंने विधर्मी पाकिस्तान के आतंकवादियों के प्रति स्नेह दर्शाते हुए हमारे आतंकवादी कहा,दुर्भाग्य कहे या विडंबना के एक तरफ युद्ध के हालात में भारतीय सेना जान हथेली पर रखकर माँ भारती के दुश्मनों को मु तोड़ जवाब दे रही है और उन्हें 72 हूरों के पास पहुचा रही है, तो वही सेना के वतनपरस्ती जज्बे ओर जुनून पर सियासत के महारथी अपनी बुद्धिमता का परिचय देकर सत्ता के मद में वतन विरोधियों को अपना बता रहे है ?ऐसे में ये कहना अतिश्योक्ति नही होगा के वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश सर्वोपरि के भाव से दुश्मनों को जवाब देने की रणनीति बना रहे है ,तो वही दूसरी ओर वरिष्ठ ओर अनुभवी माने जाने वाले सांसद और मंत्री अपनी मानसिकता ओर शैक्षिक स्तर को जाहिर कर भाजपा को कटघरे में खड़ा कर रहे है? ये कहना भी अतिशयोक्ति नही होगा कि भाजपा के शसक्त स्तंभ बन चुके मोदी जी की लोकप्रियता के कारण ही विधानसभा ओर लोकसभा चुनाव में जीत मिल रही है, वरना वास्तविकता यही है के मोदी नाम से सत्ता सुख भोग रहे विधायक और सांसदों का जनमानस में कोई जनाधार ही नही दिखता ?खेर मुद्दे की बात ये है के जिस तरह मध्यप्रदेश में मोहन यादव सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पड़ी उसके बाद सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते द्वारा आतंकीयो को हमारा कहकर संबोधित करना भाजपा की साख पर बट्टा लगा रहा है, किंतु सोचनीय पहले ये है के आलाकमान द्वारा ऐसी टीका टिप्पड़ी ओर अमर्यादित भाषा बोलने वाले भाजपाई पदासीन महारथियों पर अनुशासनात्मक कारवाही क्यो नही की जा रही है?
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