साईडलुक, (सत्यजीत यादव)। साल 2020 तक टेक्नोलॉजी को हम एक औजार की तरह देखते थे, लेकिन 2026 आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब टेक्नोलॉजी औजार नहीं रही, वह आपका सहयोगी बन चुकी है। देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 90 करोड़ के पार चली गई है और इसमें से 55 करोड़ से ज्यादा लोग रोजाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित किसी न किसी टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे टियर-टू शहरों में भी इसका असर साफ देखा जा रहा है।
एआई अब सवालों का जवाब नहीं देता, पूरे काम निपटाता है
पिछले दो सालों में सबसे बड़ा बदलाव एआई के काम करने के तरीके में आया है। पहले हम चैटजीपीटी या जेमिनी से सवाल पूछते थे और वह जवाब देता था। अब एआई एजेंटिक हो गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब आप उसे एक पूरा काम सौंप सकते हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2026 में 38 प्रतिशत फ्लाइट और होटल बुकिंग अब इंसान नहीं बल्कि एआई एजेंट कर रहे हैं। कंपनियों में भी यही हाल है। नासकॉम की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत की टॉप 100 आईटी कंपनियों में 62 प्रतिशत ने अपने कर्मचारियों के लिए एआई को-वर्कर सिस्टम लागू कर दिया है, जहां एक कर्मचारी अकेले वह काम कर रहा है जो पहले तीन लोग मिलकर करते थे।
फाइव जी पुरानी बात हुई, देश में सिक्स जी की जमीन तैयार
भारत में फाइव जी नेटवर्क अब 98 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुका है। दूरसंचार विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश में औसत इंटरनेट स्पीड 2022 के मुकाबले चार गुना बढ़कर 89 एमबीपीएस हो गई है। इसी बीच सरकार और निजी टेलीकॉम कंपनियों ने सिक्स जी पर काम तेज कर दिया है। अगले साल 2027 तक सिक्स जी का पहला ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है। सिक्स जी आने के बाद इंटरनेट की स्पीड मौजूदा फाइव जी से करीब सौ गुना तेज होगी और नेटवर्क में देरी लगभग खत्म हो जाएगी। इसका सीधा फायदा हेल्थ और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में मिलेगा। एम्स दिल्ली ने पिछले महीने ही रोबोटिक सर्जरी का एक सफल ट्रायल किया है जिसमें डॉक्टर ने 800 किलोमीटर दूर बैठकर ऑपरेशन को गाइड किया।
डाटा ही नया तेल नहीं, नई करेंसी है
आज हर कंपनी को आपका डाटा चाहिए। साइबर सिक्योरिटी फर्म के मुताबिक एक आम भारतीय के फोन में औसतन 82 ऐप हैं और उनमें से 41 ऐप लगातार लोकेशन और ब्राउजिंग डाटा ट्रैक करते हैं। इसी वजह से 2026 में डाटा प्राइवेसी सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। एप्पल और गूगल ने अपने नए अपडेट में यूजर्स को यह अधिकार दिया है कि वे किसी भी ऐप की ट्रैकिंग को एक क्लिक में बंद कर सकते हैं। भारत सरकार का डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने के बाद अब कंपनियों पर डाटा लीक होने पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
टेक्नोलॉजी में भारत अब फॉलोअर नहीं, लीडर
कभी भारत को सिर्फ टेक्नोलॉजी का बाजार कहा जाता था, अब वह टेक्नोलॉजी बनाने वाला देश बन रहा है। यूपीआई ट्रांजैक्शन ने पिछले महीने 1800 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसरो के साथ अब 140 से ज्यादा प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें छोटे शहरों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। मध्य प्रदेश से ही पिछले एक साल में 22 नए एआई आधारित स्टार्टअप रजिस्टर हुए हैं, जिनमें से 7 ग्वालियर और इंदौर से हैं। ये स्टार्टअप खेती, एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर के लिए सस्ते एआई समाधान बना रहे हैं।
कुल मिलाकर टेक्नोलॉजी का अगला दौर तेज रफ्तार का नहीं, बल्कि समझदारी का होगा। जो लोग इसे समय रहते सीख लेंगे, वे आने वाले समय में सबसे आगे रहेंगे। टेक्नोलॉजी किसी की नौकरी नहीं छीन रही, बल्कि काम करने का तरीका बदल रही है।

