साईडलुक, (सत्यजीत यादव)। साल 2026 भारतीय खेलों के लिए सिर्फ एक और साल नहीं है, यह उस बदलाव का साल है जहां भारत अब खेलों में हिस्सा लेने वाला देश नहीं, बल्कि खेलों पर राज करने की तैयारी में जुटा हुआ देश बन गया है। पेरिस ओलंपिक के बाद से जो ग्राफ ऊपर चढ़ा था, वह अब लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 से पहले अपने चरम पर है। खेल मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस साल देश में खेल बजट पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत बढ़ाकर 3442 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसका सीधा असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है।
क्रिकेट में आईपीएल अब सिर्फ टूर्नामेंट नहीं, इकॉनमी है
क्रिकेट की बात करें तो आईपीएल ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस साल आईपीएल की ब्रांड वैल्यू 12 बिलियन डॉलर के पार चली गई है और बीसीसीआई की सालाना कमाई 8500 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस बार आईपीएल फाइनल को 62 करोड़ लोगों ने एक साथ लाइव देखा, जो दुनिया में किसी भी क्रिकेट लीग के लिए सबसे बड़ा आंकड़ा है। टीम इंडिया की बात करें तो रोहित शर्मा के बाद नई कप्तानी में भारतीय टीम ने पिछले बारह महीनों में 78 प्रतिशत वनडे मैच जीते हैं। विराट कोहली भले ही टी-20 से संन्यास ले चुके हों, लेकिन वनडे में उनका औसत अभी भी 59 से ऊपर बना हुआ है, जो मौजूदा क्रिकेटरों में सबसे ज्यादा है।
ओलंपिक की तैयारी में नीरज से लेकर मनु तक, सबका निशाना गोल्ड
क्रिकेट के शोर के बीच ओलंपिक खेलों ने भी अपनी जगह पक्की कर ली है। पेरिस ओलंपिक में भारत ने 6 मेडल जीते थे, लेकिन इस बार मिशन 2028 के लिए टारगेट 15 मेडल का रखा गया है। एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा ने पिछले महीने डायमंड लीग में 90.23 मीटर का थ्रो करके एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया के सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले एथलीट हैं। पिछले तीन सालों में नीरज ने जितने भी इंटरनेशनल इवेंट में हिस्सा लिया है, उनमें से 92 प्रतिशत में वह पोडियम पर रहे हैं। शूटिंग में मनु भाकर पेरिस के बाद से लगातार टॉप फॉर्म में हैं और वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे नंबर पर बनी हुई हैं।
ग्वालियर-भोपाल जैसे छोटे शहरों से निकल रहे बड़े चैंपियन
अब खेलों की कहानी सिर्फ दिल्ली, मुंबई और हरियाणा तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बने नए हाई परफॉरमेंस सेंटर से पिछले एक साल में 11 खिलाड़ियों का चयन नेशनल कैंप के लिए हुआ है। खेलो इंडिया योजना के तहत देश भर में इस समय 278 स्पोर्ट्स अकादमी चल रही हैं, जहां करीब 15000 बच्चे मुफ्त ट्रेनिंग ले रहे हैं। यही वजह है कि एशियन गेम्स 2023 में जहां भारत ने 107 मेडल जीते थे, वहीं इस बार 2026 के एशियन गेम्स के लिए 130 से ज्यादा मेडल का अनुमान लगाया जा रहा है।
फिटनेस इंडस्ट्री ने बदली खेलों की परिभाषा
खेल अब सिर्फ स्टेडियम तक सीमित नहीं रहा। देश में फिटनेस इंडस्ट्री 85000 करोड़ रुपये की हो चुकी है। हर दूसरा युवा अब जिम, रनिंग या किसी न किसी स्पोर्ट्स एक्टिविटी से जुड़ा है। आईपीएल की तरह अब प्रो कबड्डी, अल्टीमेट खो-खो और प्रीमियर बैडमिंटन लीग ने भी ग्रामीण इलाकों तक अपनी पहुंच बना ली है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में 2026 में स्पोर्ट्स से जुड़ी नौकरियों में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें कोच, फिजियो, डाटा एनालिस्ट और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट जैसे नए करियर शामिल हैं।
अंत में इतना तय है कि भारत में खेल अब सिर्फ जीत और हार का मामला नहीं रहा, यह करियर, बिजनेस और देश की इज्जत का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।

