बार-बार ट्रिपिंग से परेशान शहरवासी, ऑनलाइन काम, पढ़ाई, पेयजल व्यवस्था और बिजली से चलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा सीधा असर; शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान की मांग
साईडलुक, जबलपुर। शहर में बिजली आपूर्ति को लेकर लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। कई इलाकों में दिन के दौरान बार-बार बिजली गुल होने और कुछ समय बाद वापस आने की स्थिति ने उपभोक्ताओं की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या केवल एक बार की बिजली कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि कई स्थानों पर दिन में कई-कई बार बिजली आने-जाने से विद्युत आपूर्ति अस्थिर बनी हुई है।
बार-बार होने वाली ट्रिपिंग का असर उन परिवारों पर सबसे अधिक पड़ रहा है, जिनका रोजमर्रा का काम बिजली पर निर्भर है। घरों में पानी की मोटर चलाने से लेकर पंखे, कूलर, फ्रिज और अन्य विद्युत उपकरणों के इस्तेमाल तक पर इसका असर दिखाई दे रहा है। गर्मी और उमस के बीच अचानक बिजली चले जाने से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जबलपुर में विद्युत वितरण व्यवस्था मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीन है। जिला प्रशासन की सार्वजनिक उपयोगिता सूची में कंपनी का मुख्य कार्यालय शक्ति भवन, विद्युत नगर, रामपुर, जबलपुर में दर्ज है और उपभोक्ताओं के लिए 18002331266 हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराया गया है।
एक कटौती खत्म नहीं होती, दूसरी की तैयारी शुरू
शहर के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही शिकायतों में सबसे बड़ी समस्या बिजली की बार-बार ट्रिपिंग बताई जा रही है। स्थानीय उपभोक्ताओं के मुताबिक कई बार बिजली कुछ मिनटों के लिए जाती है और फिर वापस आ जाती है, लेकिन इसके बाद दोबारा सप्लाई बाधित हो जाती है। इस तरह बिजली की लगातार आवाजाही से लोगों के घरेलू कामकाज के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
बिजली की ऐसी अस्थिर आपूर्ति उन छोटे कारोबारियों के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है, जिनका काम सीधे विद्युत उपकरणों पर निर्भर है। दुकानों, छोटे कार्यालयों, साइबर कैफे, प्रिंटिंग और फोटो कॉपी सेंटरों से लेकर ऑनलाइन काम करने वाले लोगों तक को बार-बार बिजली जाने से काम रोकना पड़ रहा है।
ऑनलाइन काम और पढ़ाई पर भी असर
आज बड़ी संख्या में विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाओं, इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से पढ़ाई करते हैं। इसी तरह घर से काम करने वाले कर्मचारी और छोटे व्यवसायी भी कंप्यूटर, वाई-फाई राउटर तथा अन्य उपकरणों पर निर्भर हैं। बिजली की बार-बार आवाजाही के कारण ऑनलाइन मीटिंग, डिजिटल भुगतान, प्रिंटिंग और इंटरनेट आधारित काम बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी लगातार बिजली कटना परेशानी का कारण बन सकता है। रात के समय बिजली जाने पर पढ़ाई प्रभावित होती है, जबकि दिन में भी बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण घरों और संस्थानों में कामकाज का सामान्य माहौल बिगड़ रहा है।
पानी की मोटर से लेकर घरेलू उपकरण तक प्रभावित
कई घरों में पानी की सप्लाई के लिए मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में बिजली कटौती का सीधा असर पानी भरने की व्यवस्था पर पड़ता है। बिजली आने के कुछ ही समय बाद फिर चली जाए तो मोटर चलाने का अवसर भी नहीं मिल पाता। इससे उन परिवारों की परेशानी बढ़ जाती है जहां पानी की टंकी भरने के लिए विद्युत मोटर पर निर्भरता है।
इसके अलावा फ्रिज, एयर कूलर, एसी, कंप्यूटर, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बार-बार बिजली आने-जाने से तकनीकी खराबी की आशंका भी बनी रहती है। हालांकि किसी विशेष उपकरण के खराब होने का कारण निर्धारित करने के लिए तकनीकी जांच जरूरी होती है, लेकिन लगातार वोल्टेज उतार-चढ़ाव और ट्रिपिंग को लेकर उपभोक्ताओं में चिंता स्वाभाविक है।
बघराजी क्षेत्र में भी अघोषित कटौती की शिकायत
जबलपुर के बघराजी क्षेत्र से रविवार को प्रकाशित एक स्थानीय रिपोर्ट में दिन में कई घंटे बिजली गुल रहने की शिकायत सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार बिजली कटौती से पढ़ाई, पेयजल और कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल शहर के एक इलाके तक सीमित नहीं है और ग्रामीण तथा आसपास के क्षेत्रों में भी विद्युत आपूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में बिजली बाधित होने का वास्तविक कारण अलग हो सकता है। कहीं फॉल्ट, कहीं ट्रांसफार्मर या लाइन संबंधी समस्या, कहीं निर्धारित रखरखाव और कहीं अत्यधिक लोड के कारण आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसी एक कारण को पूरे शहर में बार-बार बिजली गुल होने की वजह मानने से पहले विद्युत कंपनी के क्षेत्रवार फॉल्ट और आउटेज आंकड़ों की जांच जरूरी है।
मांग बढ़ने के बीच वितरण व्यवस्था पर दबाव
मध्यप्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति का प्रबंधन लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के आधिकारिक पोर्टल पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 14 जनवरी 2026 को अधिकतम मांग पूरी होने का आंकड़ा 19,895 मेगावाट दर्ज है। इससे प्रदेश के बिजली तंत्र पर पड़ने वाले बड़े लोड का अंदाजा लगाया जा सकता है।
हालांकि प्रदेश स्तर पर बिजली की मांग का आंकड़ा सीधे जबलपुर शहर में होने वाली प्रत्येक ट्रिपिंग की वजह साबित नहीं करता। स्थानीय समस्या का वास्तविक कारण जानने के लिए जबलपुर के वितरण फीडर, ट्रांसफार्मर, लाइन फॉल्ट, ट्रिपिंग और शिकायत निवारण के क्षेत्रवार आंकड़ों की जरूरत होगी।
लोगों की मांग-कटौती का कारण और समय स्पष्ट करे कंपनी
शहरवासियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में तकनीकी खराबी या मेंटेनेंस के कारण बिजली बंद करनी है तो उसकी स्पष्ट सूचना उपभोक्ताओं को दी जानी चाहिए। इससे लोग अपने जरूरी काम पहले से व्यवस्थित कर सकते हैं। लेकिन अचानक बिजली जाने और कुछ देर बाद लौटने के बाद फिर गुल हो जाने की स्थिति सबसे ज्यादा परेशानी पैदा करती है।
उपभोक्ताओं की मांग है कि बिजली कंपनी प्रत्येक क्षेत्र में बार-बार ट्रिपिंग वाले फीडरों की पहचान करे, तकनीकी खामियों को दूर करे और उन इलाकों में पुराने या ओवरलोडेड विद्युत उपकरणों की जांच कराए जहां लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
शिकायतों के आंकड़े सार्वजनिक होने से साफ होगी वास्तविक तस्वीर
जबलपुर में बिजली आपूर्ति को लेकर वास्तविक स्थिति का आकलन केवल उपभोक्ताओं की शिकायतों से नहीं, बल्कि बिजली कंपनी के आधिकारिक आंकड़ों से भी किया जा सकता है। प्रत्येक वितरण क्षेत्र में कितनी बार बिजली बंद हुई, कितने फीडर प्रभावित हुए, कितने ट्रांसफार्मर फेल हुए, शिकायत मिलने के बाद औसतन कितने समय में आपूर्ति बहाल हुई और किन क्षेत्रों में सबसे अधिक ट्रिपिंग दर्ज हुई, इन आंकड़ों से समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहर में बार-बार बिजली गुल होने की शिकायतों को विद्युत कंपनी किस स्तर पर दर्ज कर रही है और समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या तकनीकी कदम उठाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिलना केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि घरेलू जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कारोबार और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा है।
फिलहाल शहर के अलग-अलग हिस्सों से आ रही शिकायतों ने बिजली वितरण व्यवस्था की निगरानी और फॉल्ट प्रबंधन पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित बिजली कंपनी इन शिकायतों का क्षेत्रवार तकनीकी आकलन कर कितनी जल्दी स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाती है।

