26 भैंसवंशी पशुओं को क्रूरतापूर्वक ठूंस कर ले जा रहा था आईसर ट्रक, पशु क्रूरता और कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम में मामला दर्ज
साईडलुक, डिंडौरी। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के शहपुरा थाना क्षेत्र में मवेशियों के साथ की जा रही क्रूरता के एक सनसनीखेज मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शहपुरा ने क्रूरतापूर्वक मवेशी परिवहन करने के आरोपी रिजवान खान और राजा बाबू खान की जमानत याचिका को खारिज करते हुए दोनों को जिला जेल डिंडौरी भेजने का आदेश दिया है।
मीडिया सेल प्रभारी अभियोजन अधिकारी दिलावर धुर्वे ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरा मामला थाना शहपुरा के अपराध क्रमांक 516/2026 से जुड़ा है। इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद रफीक पिता सब्बीर खान उम्र 43 वर्ष निवासी मकान नंबर 4497 निर्भय नगर सुभाष वार्ड आधारताल जिला जबलपुर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
अभियोजन के अनुसार दिनांक 12 सितंबर 2026 को सुबह करीब 07 बजकर 54 मिनट पर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर आईसर कंपनी के ट्रक क्रमांक एमपी 20 एक्सबी 5439 को रोका। जांच में पाया गया कि वाहन में अत्यंत क्रूरतापूर्ण तरीके से मवेशी भरे हुए थे। ट्रक में 20 नग भैंस पडिया और 6 नग पडा सहित कुल 26 नग मवेशी ठूंस-ठूंस कर भरे गए थे जिनकी अनुमानित कीमत 2 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई है। वहीं जप्त किए गए ट्रक की कीमत लगभग 25 लाख रुपये है। इस प्रकार कुल मशरूका 27 लाख 60 हजार रुपये का बनता है।
पुलिस ने मौके पर ही गवाहों के समक्ष सभी मवेशियों को जप्त कर पशु चिकित्सीय परीक्षण के लिए तहरीर जारी की। इसके बाद स्टाफ और गवाहों की मदद से सभी 26 मवेशियों को सुरक्षित रूप से ग्राम पंचायत कहेजरा स्थित गौशाला में जमा कर पावती प्राप्त की गई। पशु चिकित्सा अधिकारी पशु अस्पताल कोहनी देवरी को मवेशियों के एमएलसी के लिए अलग से तहरीर दी गई।
जांच में आरोपी चालक मोहम्मद रफीक का कृत्य पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(घ) के साथ ही मध्यप्रदेश कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6, 10 एवं मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66/192 के तहत दंडनीय पाया गया। आधार कार्ड के आधार पर सत्यापन करने के बाद आरोपी को उसके संवैधानिक अधिकारों से अवगत कराकर दिनांक 12.09.2026 को सुबह 08.30 बजे गिरफ्तार किया गया और इसकी सूचना उसके बड़े भाई अतहर भाईजान को मोबाइल के माध्यम से दी गई।
इसी दौरान इस गोरखधंधे में शामिल अन्य दो आरोपी राजा बाबू खान और रिजवान खान मौके से फरार हो गए थे। पुलिस आरक्षक 205 एसएसयू पिंकेश द्वारा उनकी तलाश की गई लेकिन दोनों का पता नहीं चल सका। बाद में पुलिस ने मोहम्मद रफीक के साथ ही राजा बाबू खान, रिजवान खान एवं नीतेश शुक्ला महाराज निवासी चांदपुर पडरिया के विरुद्ध अपराध कायम कर विवेचना प्रारंभ की।
शनिवार को जब आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई तो एडीपीओ शहपुरा प्रमोद पटेल ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि जिस निर्दयता के साथ बेजुबान पशुओं को एक छोटे से वाहन में ठूंस कर परिवहन किया जा रहा था वह अत्यंत अमानवीय है और ऐसे आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए माना कि आरोपियों का कृत्य गंभीर प्रकृति का है और उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा। इसी के साथ न्यायालय ने दोनों आरोपियों की जमानत निरस्त करते हुए जेल वारंट जारी कर दिया।
पुलिस अब इस मामले में फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश और इस तस्करी के पीछे के पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।

