ज्ञान आश्रय कोचिंग के विद्यार्थियों को मिली निःशुल्क कानूनी सहायता और लोक अदालत की कार्यप्रणाली की प्रत्यक्ष जानकारी, 6 और 9 के उदाहरण से समझाया न्याय का नजरिया
साईडलुक, जबलपुर। सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन किताबों से निकलकर कानून को जमीन पर समझने का दिन रहा। ज्ञान आश्रय निःशुल्क कोचिंग क्लासेस में अध्ययनरत यूपीएससी और एमपीपीएससी के अभ्यर्थियों ने आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य किताबी कानून के साथ-साथ न्याय सुलभ कराने वाली संस्थाओं की व्यावहारिक कार्यप्रणाली को नजदीक से जानना था।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचने पर अभ्यर्थियों का स्वागत जिला विधिक सहायक अधिकारी भागवत दयाल दीक्षित ने किया। श्री दीक्षित ने अभ्यर्थियों को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत गठित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण से लेकर राज्य, जिला और तहसील स्तर तक की पूरी संरचना को सरल भाषा में समझाया।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग, अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों, आपदा पीड़ितों और ऐसे विचाराधीन बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है जिनकी वार्षिक आय निर्धारित सीमा से कम है। इसके तहत पात्र व्यक्ति को न सिर्फ निःशुल्क अधिवक्ता बल्कि कोर्ट फीस, दस्तावेजों का खर्च और लोक अदालतों के माध्यम से त्वरित न्याय भी दिलाया जाता है।
6 और 9 के उदाहरण से दिया जीवन और न्याय का बड़ा संदेश
भ्रमण के दौरान श्री दीक्षित ने विद्यार्थियों को सिर्फ कानूनी धाराएं नहीं बल्कि न्यायिक दृष्टिकोण का असली मर्म भी समझाया। उन्होंने एक बेहद रोचक उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे जमीन पर लिखा हुआ 6 एक तरफ से देखने पर 6 दिखता है और दूसरी तरफ से देखने पर 9 बन जाता है, वैसे ही समाज में किसी भी विवाद या घटना को देखने का नजरिया बदलने पर उसका अर्थ बदल सकता है। इसलिए एक भविष्य के प्रशासक और न्यायप्रिय नागरिक के लिए जरूरी है कि वह किसी भी मामले में एकतरफा निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों को धैर्यपूर्वक सुने।
उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत, स्थायी लोक अदालत, मध्यस्थता केन्द्र, विधिक साक्षरता शिविर और जेलों में संचालित विधिक सहायता क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। अभ्यर्थियों ने इस दौरान निःशुल्क विधिक सहायता के लिए पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया, टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 और नालसा की योजनाओं को लेकर कई सवाल पूछे, जिनका श्री दीक्षित ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान किया।
भ्रमण में ये रहे उपस्थित
इस शैक्षणिक भ्रमण के अवसर पर ज्ञान आश्रय निःशुल्क कोचिंग क्लासेस के सहायक संचालक संतोष सेंगर ने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी में संविधान और कानून को किताबों के साथ-साथ संस्थाओं में जाकर समझना बेहद जरूरी है। इस अवसर पर कोचिंग के प्रबंधक बलराम प्रजापति, शिक्षक कमलाकर सतनामी, पी. साईं हेमंत और एडवोकेट अतुल कुशवाह सहित बड़ी संख्या में यूपीएससी एवं एमपीपीएससी के अभ्यर्थी उपस्थित रहे। सभी अभ्यर्थियों ने इस भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताया।

