डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| भोपाल स्थित जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में डिंडौरी जिले में शिक्षकों की व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। कलेक्टर नेहा मारव्या सिंह के मार्गदर्शन और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग डिंडौरी की निगरानी में सभी विकास खंड शिक्षा अधिकारियों से अतिशेष शिक्षकों की सूची रिक्त पदों के साथ मांगी गई थी।
आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय भोपाल की मंशा के अनुसार, इन शिक्षकों को शून्य शिक्षकीय शालाओं एवं विषयवार रिक्त पदों पर युक्तियुक्त रूप से समायोजित किया गया है। सभी अतिशेष शिक्षकों से विकल्प पत्र भरवाए गए हैं और संभावना जताई जा रही है कि 25 अप्रैल तक स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए जाएंगे। डिंडौरी जिला प्रशासन नए शिक्षा सत्र में सभी शालाओं में शिक्षकों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है। विकास खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा संलग्नीकरण समाप्त कर युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है।
खास बात यह है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में महिलाओं और विकलांग शिक्षकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षक संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
जारी आदेश के मुताबिक…
जनजातीय कार्य विभाग के निर्देश पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, शहपुरा द्वारा अतिशेष शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को गति देते हुए 5 शिक्षण संस्थाओं के विकल्प प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शालाओं में पदस्थ अतिशेष शिक्षकों को 17 अप्रैल से 21 अप्रैल 2025 तक कार्यालय में उपस्थित होकर विकल्प पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया है।
जारी पत्र क्रमांक 65/वि.खं.शि.अधि./यु.यु.क./2025-26 के अनुसार, प्राप्त सूचियों में जिन शिक्षकों के नाम शामिल हैं, वे विकल्प पत्र के माध्यम से कम से कम एक “शून्य शिक्षकीय संस्था” का चयन अवश्य करें। प्राथमिक शिक्षक केवल प्राथमिक शालाओं का चयन करें, वहीं माध्यमिक व उच्च श्रेणी के शिक्षक माध्यमिक/हाई स्कूल/हायर सेकेंडरी संस्थाओं का विकल्प चुन सकते हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी शहपुरा द्वारा यह जानकारी विभागीय सूचना पटल पर भी प्रदर्शित कर दी गई है। इसके साथ ही सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य, जिला डिंडौरी को प्रतिलिपि के रूप में यह सूचना प्रेषित कर दी गई है।यह कदम शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं शिक्षकों की न्यायसंगत पदस्थापना सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।



