डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत दूधी मझौली में 15वें वित्त आयोग से प्राप्त केंद्रीय सहायता राशि में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सरपंच यशोदा पट्टा और सचिव कमल सिंह धुर्वे पर आरोप है कि उन्होंने बिना कार्य, बिना जियो टैग, फर्जी बिल और अमान्य फोटो के माध्यम से लाखों रुपये की राशि का भुगतान अपने चहेते फर्मों को कर डाला। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में दर्ज आंकड़ों और अपलोड की गई तस्वीरों में भारी गड़बड़ी सामने आई है। बिना प्रयोजन, धुंधले और गैर-मान्य फोटो, बिना GST नंबर वाले फर्जी बिलों से वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में कई संदिग्ध भुगतान किए गए हैं।

संदिग्ध भुगतान Construction Of Retaining Walls/Fencing Work (वर्क ID: 102648238) में एक ही अमान्य फोटो लगाकर प्रिंस ट्रेडर्स – ₹3,38,800,आस्था फोटो कॉपी – ₹15,000,गणेश ट्रेडर्स – ₹89,500 ऐसी ही कई अन्य वर्क ID में अवधिया फोटो और कंप्यूटर वर्क – ₹38,495 प्रिंस ट्रेडर्स (अन्य व्यय) – ₹21,250 ,मनीष होटल – ₹16,960,JJ ऑटो मोटर्स – ₹83,000 का भुगतान किया गया है ऐसी कई बिल देखा जा सकता है।
5वें वित्त की राशि में भी गोलमाल…
सचिव द्वारा बिना सरपंच के हस्ताक्षर के “पंकज मोबाइल एंड कंप्यूटर” से ₹71,700 की लागत से लैपटॉप और अन्य उपकरण खरीदे का बिल भुगतान किया गया, जबकि पंचायत में पहले से ये सामग्री उपलब्ध थी फोटोकॉपी और ऑनलाइन वर्क जैसे खर्चों के नाम पर भी लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है।

योजना का उद्देश्य और असल में हो रहा दुरुपयोग…
15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों को 60:40 के अनुपात में कार्य योजना बनाकर ग्रामसभा से अनुमोदन कराना होता है। इस राशि का उपयोग स्वच्छता (30%), शिक्षा (30%) और अधोसंरचना (40%) में करना निर्धारित है। लेकिन दूधी मझौली पंचायत में जीपीडीपी (ग्राम पंचायत विकास योजना) सिर्फ कागजों पर दिखाई दे रही है, खर्च कहीं और हो रहा है।
प्रशासन मौन, भ्रष्टाचार बेखौफ….
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का यह खेल सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है। डिंडौरी जिले की कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह के फर्जीवाड़े की बू आ रही है। यही कारण है कि कई सरपंच और सचिव अल्प समय में ही आमदनी से कई गुना अधिक संपत्ति के मालिक बन चुके हैं।




