क्या राजनीतिक पहचान बन रही कार्रवाई में ढाल, या जांच एजेंसियां कर रही हैं सही प्रक्रिया का इंतजार?
साईडलुक (सत्यजीत यादव)। देशभर में करोड़ों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर देने वाले NEET-UG पेपर लीक मामले ने अब सिर्फ परीक्षा प्रणाली ही नहीं, बल्कि राजनीतिक निष्पक्षता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल उठ रहा है कि जिन आरोपियों के खिलाफ करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप लगे हैं, उनके घरों पर अब तक बुलडोजर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? खासकर तब, जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक आरोपों में मुख्य आरोपियों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की चर्चा सामने आई है।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI और अन्य एजेंसियों ने कई गिरफ्तारियां की हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान और महाराष्ट्र से जुड़े कुछ आरोपियों के राजनीतिक संबंधों को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। कुछ रिपोर्टों में आरोपी दिनेश बिंवाल को भाजपा कार्यकर्ता बताया गया है, जबकि भाजपा और कांग्रेस दोनों स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
बुलडोजर राजनीति पर फिर छिड़ी बहस
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्टों में यह तुलना की जा रही है कि कई राज्यों में आरोप लगते ही बुलडोजर कार्रवाई तेज़ी से होती है, लेकिन NEET जैसे राष्ट्रीय परीक्षा घोटाले में अब तक वैसी तस्वीर देखने को नहीं मिली। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि क्या “बुलडोजर न्याय” सिर्फ चुनिंदा मामलों तक सीमित है? वहीं सरकार समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि किसी भी कार्रवाई के लिए कानूनी प्रक्रिया और संपत्ति की वैधता की जांच जरूरी होती है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में “बुलडोजर जस्टिस” को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। अदालत ने साफ कहा था कि केवल आरोपी होने के आधार पर किसी की संपत्ति को नहीं गिराया जा सकता और उचित नोटिस व कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य है।
22 लाख छात्रों के भविष्य पर संकट
NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा ने करीब 22 लाख छात्रों को मानसिक दबाव में डाल दिया है। कई छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे “देश का सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला” बताया है। आरोप है कि परीक्षा से पहले कथित “गेस पेपर” वायरल हुए थे, जिनके कई सवाल असली पेपर से मेल खाते पाए गए।
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। वहीं तमिलनाडु के नेता M. K. Stalin ने NEET व्यवस्था को ही “स्कैम” करार दिया।
जांच में परिवार और पुराने एडमिशन भी रडार पर
जांच एजेंसियों के अनुसार मामला केवल 2026 परीक्षा तक सीमित नहीं रह सकता। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपियों के परिवार के कई सदस्यों के पुराने मेडिकल एडमिशन भी जांच के दायरे में हैं। CBI ने कई आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की है और कुछ को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
इधर छात्रों और युवाओं के बीच गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। नागपुर, जयपुर और अन्य शहरों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
बड़ा सवाल अब भी कायम
देशभर में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि यदि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में आरोपी प्रभावशाली राजनीतिक संपर्क रखते हैं, तो क्या कार्रवाई की रफ्तार प्रभावित हो रही है? या फिर एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी कठोर कदम से बच रही हैं? फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक प्रतीक बन चुका है।
शिक्षा व्यवस्था पर भरोसे की लड़ाई
NEET विवाद ने एक बार फिर भारत की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। पहले भी देश ने Vyapam scam जैसे बड़े परीक्षा घोटाले देखे हैं, जिनकी छाया वर्षों तक बनी रही। अब NEET विवाद ने युवाओं के भीतर यह चिंता बढ़ा दी है कि क्या मेहनत से ज्यादा सिस्टम की पहुंच और पैसे का खेल भारी पड़ रहा है।

