मदुरै कोर्ट का सख्त रुख, ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए सुनाई गई सजा; 2020 की बर्बर घटना पर आखिरकार मिला न्याय
साईडलुक, डेस्क। तमिलनाडु के बहुचर्चित सत्तनकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में न्यायपालिका ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए पुलिस अत्याचार पर बड़ा संदेश दिया है। मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2020 में पुलिस हिरासत में हुई पिता-पुत्र की मौत के मामले में दोषी पाए गए सभी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है।
यह मामला उस समय पूरे देश में सुर्खियों में आया था, जब थूथुकुड़ी जिले के सत्तनकुलम में दुकानदार पी.जयराज और उनके बेटे जे.बेनिक्स को लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि पुलिस हिरासत में दोनों को अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसके चलते उनकी मौत हो गई।
घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था और इसे पुलिस क्रूरता का प्रतीक माना गया। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद 23 मार्च 2026 को अदालत ने सभी 9 पुलिसकर्मियों को दोहरे हत्या के अपराध में दोषी ठहराया था।
सजा सुनाते हुए अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखा, जिसमें अधिकतम दंड की मांग की गई थी। अभियोजन पक्ष और पीड़ित परिवार ने भी कठोर सजा की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि पूरे देश में पुलिस सुधार और मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी एक सशक्त संदेश देता है।
क्या है इस फैसले का महत्व ?
यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि भारत में पुलिसकर्मियों को कस्टोडियल डेथ के मामलों में फांसी की सजा बहुत ही दुर्लभ है। इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून के रखवालों द्वारा किए गए अपराधों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाएगा जितना किसी अन्य अपराध को।
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