राजस्व विभाग ने कसी नकेल,
डिजिटलीकरण योजना में उदासीनता पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई
साईडलुक, जबलपुर। मध्यप्रदेश राजस्व विभाग की महत्वाकांक्षी ‘लिगेसी रिकॉर्ड डिजिटलीकरण’ योजना में गंभीर लापरवाही उजागर होने के बाद जबलपुर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है, डिजिटल इंडिया की राह में लापरवाही बर्दाश्त नहीं।
राजस्व विभाग वर्तमान में जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत छह प्रकार के पुराने राजस्व अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पटवारी को पोर्टल पर डेटा सार्वजनिक करने से पहले कुल रिकॉर्ड का न्यूनतम 5 प्रतिशत अनिवार्य रूप से सत्यापित करना होता है।
नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में जांच नहीं की गई, तो डेटा 10 दिनों के भीतर स्वतः (ऑटो) अपडेट होकर पोर्टल पर प्रदर्शित होने लगता है। इससे गलत या अधूरी जानकारी आम नागरिकों तक पहुँचने का गंभीर खतरा बना रहता है।
किन पटवारियों पर हुई कार्रवाई?
पाटन तहसील के पटवारी देवेंद्र पटेल और रांझी तहसील के पटवारी चंद्रशेखर चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने निर्धारित समय-सीमा के भीतर डिजिटाइज़्ड रिकॉर्ड की जांच नहीं की, जिसके फलस्वरूप संबंधित डेटा ऑटो अपडेट मो* पर चला गया। इसे वरिष्ठ कार्यालयों के आदेशों की सीधी अवहेलना और शासकीय कार्यों में अक्षम्य लापरवाही मानते हुए यह कठोर कार्रवाई की गई।
निलंबन की शर्तें
निलंबन अवधि के दौरान देवेंद्र पटेल का मुख्यालय पाटन तहसील कार्यालय और चंद्रशेखर चौधरी का मुख्यालय रांझी तहसील कार्यालय नियत किया गया है। दोनों कर्मचारी इसी दायरे में रहकर जवाब देने के लिए बाध्य होंगे।
क्यों अहम है यह योजना?
‘लिगेसी रिकॉर्ड डिजिटलीकरण’ परियोजना केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका मुख्य उद्देश्य दशकों पुराने भूमि और राजस्व अभिलेखों को ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराना है, ताकि किसान और आम नागरिक घर बैठे अपना रिकॉर्ड देख सकें, भूमि विवादों में कमी आए और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत समाप्त हो। पारदर्शिता और जवाबदेही इस योजना की आत्मा है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही न केवल योजना को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि सीधे तौर पर आम नागरिकों के हितों को भी प्रभावित करती है।
प्रशासन का सख्त संदेश
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के साथ स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटलीकरण के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की शिथिलता या उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में अन्य तहसीलों में भी कार्यप्रगति की गहन समीक्षा किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। यह कार्रवाई जिले के समस्त राजस्व कर्मचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है।

