राष्ट्रपति ट्रंप के सीजफायर अल्टीमेटम के बाद तेहरान ने बरसाईं मिसाइलें, कुवैत-बहरीन-जॉर्डन के बेस निशाने पर
साईडलुक, डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने अमेरिका पर जवाबी हमला करते हुए मध्य पूर्व के 8 देशों में स्थित 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर अल्टीमेटम के बाद की गई है।
आईआरजीसी के मुताबिक 10 जून 2026 को जॉर्डन स्थित अमेरिकी अल-अजरक बेस, कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय समेत कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। तेहरान ने कहा कि उसने विमान हैंगर, कमांड सेंटर और संचार बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया और चेतावनी दी कि आगे किसी भी अमेरिकी कार्रवाई का “कुचलने वाला और निर्णायक” जवाब दिया जाएगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के लगभग 20 वायु रक्षा, रडार और निगरानी स्थलों पर हमले किए थे। अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन गिराए जाने के जवाब में की गई थी। इसके बाद ईरान ने 1 जून और 6 जून को भी कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
सीएनएन और अन्य रिपोर्टों के अनुसार ईरानी हमलों में उन्नत रडार, संचार टावर और विमान संरचनाएं मुख्य निशाना बनीं। एक अमेरिकी स्रोत ने माना कि नुकसान का पैमाना अभूतपूर्व है और कुछ सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर आंशिक रूप से अनुपयोगी हो गई हैं। वहीं जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने अल-अजरक की ओर आ रही पांच मिसाइलों को मार गिराया, जबकि बहरीन और कुवैत ने भी हवाई खतरों को नाकाम करने का दावा किया।
आईआरजीसी ने 28 मई को बंदर अब्बास हवाई अड्डे के पास अमेरिकी हमले के जवाब में एक अमेरिकी एयर बेस को भी निशाना बनाने का दावा किया था। लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार आईआरजीसी ने मार्च में भी 27 अमेरिकी ठिकानों पर छठी लहर के हमले की बात कही थी, जिसमें तेल अवीव स्थित तेल नोफ एयरबेस और हाकिर्या सैन्य मुख्यालय शामिल थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 मई को कहा था कि ईरान “फ्यूम्स पर बातचीत” कर रहा है और चेतावनी दी थी कि वार्ता विफल होने पर सैन्य कार्रवाई तेज की जा सकती है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद यह सबसे गंभीर टकराव माना जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती आकलन में ईरान की ज्यादातर मिसाइलें और ड्रोन रोक लिए गए और अमेरिकी ठिकानों को कोई बड़ा नुकसान या जनहानि नहीं हुई है। लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में 16 ठिकानों के प्रभावित होने और कुछ के “वर्चुअली इनऑपरेबल” होने की बात सामने आई है।
फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट गहरा गया है और शांति वार्ता की संभावनाएं धुंधली पड़ती दिख रही हैं।

