लाइसेंस जांच और खरीदार के सत्यापन के बिना अमोनियम नाइट्रेट की लिस्टिंग का मामला, सीसीपीए ने बिक्री तत्काल रोकने का दिया आदेश
साईडलुक, सत्यजीत यादव। ऑनलाइन कारोबार के नाम पर खतरनाक और कड़े नियमन वाले पदार्थों की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने डायल4ट्रेड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण के मुताबिक कंपनी के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अमोनियम नाइट्रेट की ऑनलाइन लिस्टिंग, होस्टिंग, विज्ञापन और बिक्री की सुविधा ऐसे समय उपलब्ध कराई गई, जब कानून के तहत अपेक्षित नियामकीय सुरक्षा और सत्यापन व्यवस्था मौजूद नहीं थी। यह अंतिम आदेश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 10, 20 और 21 के तहत पारित किया गया है।
सिर्फ जुर्माना नहीं, ऐसी सभी लिस्टिंग तत्काल हटाने का निर्देश
CCPA ने डायल4ट्रेड को अमोनियम नाइट्रेट की लिस्टिंग, होस्टिंग, विज्ञापन और बिक्री की सुविधा तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है। आदेश का दायरा केवल इसी पदार्थ तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि विस्फोटक अधिनियम, 1884 के तहत विस्फोटक के रूप में वर्गीकृत अन्य पदार्थों को भी प्लेटफॉर्म पर इसी तरह सूचीबद्ध या बिक्री के लिए उपलब्ध कराने से रोकने का निर्देश दिया गया है।
जांच में सामने आईं गंभीर कमियां
CCPA की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह सामने आया कि अमोनियम नाइट्रेट की ऑनलाइन बिक्री से पहले आवश्यक वैधानिक जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त रूप से लागू नहीं थी। प्राधिकरण के अनुसार संबंधित विक्रेता के वैध PESO लाइसेंस की जानकारी और उसकी पुष्टि की व्यवस्था नहीं मिली। इसके अलावा खरीदार की पहचान तथा उसके पास आवश्यक लाइसेंस या वैधानिक पात्रता होने की जांच भी उस स्तर पर नहीं थी, जिसकी ऐसे नियंत्रित पदार्थ के मामले में अपेक्षा की जाती है।
प्राधिकरण ने लेन-देन की अनुरेखणीयता और पदार्थ के कब्जे तथा उपयोग पर लागू कानूनी प्रतिबंधों से जुड़ी आवश्यक चेतावनियों के अभाव को भी गंभीरता से लिया। CCPA का कहना है कि ऐसे पदार्थ को सामान्य उपभोक्ता उत्पाद की तरह प्रस्तुत करना और उसकी वैध खरीद के लिए आवश्यक लाइसेंस संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराना उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली स्थिति पैदा कर सकता है।
विस्फोट से जुड़े चित्रों पर भी CCPA ने जताई आपत्ति
जांच के दौरान प्राधिकरण ने यह भी पाया कि संबंधित ऑनलाइन लिस्टिंग में विस्फोट और उसके प्रभावों को दर्शाने वाली तस्वीरें इस्तेमाल की गई थीं। CCPA के अनुसार ऐसी तस्वीरें पदार्थ की खतरनाक और नियंत्रित प्रकृति के बारे में आवश्यक चेतावनी देने के बजाय उत्पाद की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाली हो सकती हैं।
प्राधिकरण ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसी उत्पाद लिस्टिंग को महज सूचना नहीं माना, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत विज्ञापन की कसौटी पर भी परखा। CCPA के अनुसार इंटरनेट पर डिजिटल मार्केटप्लेस के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचने वाली ऐसी लिस्टिंग विज्ञापन की परिभाषा के दायरे में आ सकती है।
“हम तो सिर्फ B2B प्लेटफॉर्म हैं” दलील भी नहीं चली
डायल4ट्रेड की ओर से यह तर्क दिया गया कि वह बिजनेस-टू-बिजनेस यानी B2B मार्केटप्लेस के रूप में काम करता है और तीसरे पक्ष के विक्रेताओं द्वारा डाली गई लिस्टिंग के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। लेकिन CCPA ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
प्राधिकरण ने अपने आदेश में प्लेटफॉर्म के कामकाज की प्रकृति को भी देखा। CCPA के अनुसार संबंधित पदार्थ को अपेक्षाकृत छोटी मात्रा में भी खरीदने की अनुमति थी और ऐसी खरीद के लिए न्यूनतम ऑर्डर मात्रा अथवा संस्थागत खरीदार के सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं थीं। इसी आधार पर केवल स्वयं को B2B मार्केटप्लेस बताना जिम्मेदारी से बचने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
IT Act की ‘सेफ हार्बर’ दलील पर भी CCPA की सख्ती
मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मध्यस्थों को मिलने वाले सुरक्षित आश्रय यानी safe-harbour संरक्षण का सवाल भी उठा। CCPA ने माना कि ऐसा संरक्षण संबंधित उचित सावधानी संबंधी दायित्वों के अनुपालन से जुड़ा है।
प्राधिकरण ने विशेष रूप से यह अंतर रेखांकित किया कि किसी प्रतिबंधित या खतरनाक पदार्थ की लिस्टिंग पहले उपलब्ध करा दी जाए और उसके बाद शिकायत या जानकारी मिलने पर उसे हटा दिया जाए, यह व्यवस्था अपने आप में पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। ऐसे मामलों में शुरुआत में ही आवश्यक सत्यापन और अनुपालन व्यवस्था होना जरूरी है।
प्लेटफॉर्म के पास विक्रेता और लिस्टिंग नियंत्रित करने की क्षमता भी थी
CCPA ने यह भी पाया कि डायल4ट्रेड के पास विक्रेताओं को ब्लॉक करने और अपने प्लेटफॉर्म से उत्पादों की लिस्टिंग हटाने की क्षमता मौजूद थी। प्राधिकरण ने इसे इस बात के संकेत के रूप में देखा कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री को लेकर कंपनी के पास नियंत्रण की क्षमता थी। इसलिए केवल तीसरे पक्ष के विक्रेता द्वारा लिस्टिंग अपलोड किए जाने का तर्क पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त करने वाला नहीं माना गया।
अब दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में
डायल4ट्रेड के खिलाफ कार्रवाई को CCPA की व्यापक जांच का हिस्सा बताया गया है। प्राधिकरण ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर खतरनाक रसायनों, विस्फोटक पदार्थों और उनसे जुड़े नियंत्रित पदार्थों की कथित अनधिकृत बिक्री से संबंधित मामलों की जांच कर रहा है। सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस व्यापक जांच में अमोनियम नाइट्रेट के साथ कुछ अन्य खतरनाक एवं विस्फोटक श्रेणी के पदार्थ भी शामिल हैं।
इस कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब केवल विक्रेता और खरीदार को जोड़ने वाले डिजिटल माध्यम के रूप में अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग नहीं रह सकते, खासकर तब जब प्लेटफॉर्म पर ऐसे उत्पाद उपलब्ध हों जिनकी बिक्री, कब्जे और उपयोग पर कानून के तहत विशेष नियंत्रण लागू होता है।
CCPA का संदेश साफ-डिजिटल बाजार में भी कानून से समझौता नहीं
CCPA ने दोहराया है कि उपभोक्ता ऑनलाइन खरीदारी के दौरान प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उत्पाद की जानकारी और उसके विवरण पर भरोसा करते हैं। ऐसे में नियंत्रित या खतरनाक पदार्थों की लिस्टिंग में गलत, अधूरी अथवा भ्रामक जानकारी उपभोक्ता संरक्षण के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा का भी गंभीर सवाल बन सकती है।
डायल4ट्रेड पर लगाया गया 10 लाख रुपये का जुर्माना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मामला केवल किसी सामान्य उत्पाद के गलत विज्ञापन से जुड़ा नहीं है। यहां CCPA ने डिजिटल मार्केटप्लेस की जिम्मेदारी, विक्रेता सत्यापन, खरीदार की पात्रता, नियामकीय अनुपालन और खतरनाक उत्पादों की ऑनलाइन प्रस्तुति को एक साथ परखा है।
आदेश CCPA की वेबसाइट पर उपलब्ध
CCPA के आधिकारिक आदेश रिकॉर्ड में डायल4ट्रेड से संबंधित मामला 1 सितंबर 2026 की तारीख के साथ दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में इसे अमोनियम नाइट्रेट की ऑनलाइन लिस्टिंग और बिक्री से संबंधित भ्रामक विज्ञापन एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले के रूप में दर्ज किया गया है।
निष्कर्ष यह है कि ऑनलाइन कारोबार के बढ़ते दायरे के साथ प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही भी बढ़ रही है। CCPA की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियंत्रित और खतरनाक पदार्थों को सामान्य ऑनलाइन उत्पाद की तरह प्रस्तुत करना नियामकीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।

