साईडलुक, जबलपुर। भरतीपुर स्थित श्रीझूलेलाल मंदिर में मंगलवार को धर्म और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अवसर था चालीसा व्रत महोत्सव पर्व की पूर्ण आहुति का। पूरे परिसर में श्रद्धा का उल्लास और भजन-कीर्तन की ध्वनि गूँज रही थी। कोई सिर पर ज्योति कलश लेकर मंदिर की परिक्रमा कर रहा था, तो कोई वरूण देव भगवान झूलेलालजी की प्रतिमा के समक्ष दीपदान और ज्योति पूजन में लीन रहे।
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा। सैकड़ों महिलाओं ने ज्योति पूजन व दीपदान कर 40 दिवसीय व्रत की पूर्ण आहुति दी। सिर पर कलश, उस पर मोमबत्ती एवं आटे के दीप में प्रज्ज्वलित ज्योति (बहराणा साहब) रखकर मंदिर की सात परिक्रमा करने का भावनात्मक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा।
भक्तों ने कहा कि जब भगवान विष्णु चातुर्मास में क्षीरसागर में शयन हेतु गए थे, तब वरूण देव भगवान झूलेलाल ने मानव जाति पर कृपा बरसाई थी। उन्हीं की स्मृति में यह 40 दिवसीय व्रत रखा जाता है। इस अवसर पर मटकी शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएँ एवं पुरुष शामिल हुए।
इसके उपरांत बहराणा साहब की मटकी ज्योति शोभायात्रा मंदिर से निकली जो गलगला, मुकादमगंज, तुलाराम चौक, करमचंद चौक होते हुए कॉफी हाउस रोड, बड़ी ओमती चौक, घंटाघर से सिंधु भवन पहुँची। शोभायात्रा में पुष्पों से सुसज्जित वरूण देवता की भव्य झांकी जनमानस का केन्द्र रही। भजन मंडलियों की स्वर लहरियों और धमाल-ढोल की थाप ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
शोभायात्रा का नेतृत्व स्वामी अशोकानंद महाराज (भक्तिधाम), स्वामी प्रदीप महाराज, वेदांत शर्मा, विधायक अशोक रोहाणी, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, युवा नेता सोनू बचवानी, करतार सिंह भटीजा ने किया। पारंपरिक शैला नृत्य और चाचर नृत्य ने यात्रा में विशेष आकर्षण भरा।
ग्वारीघाट पहुँचकर माँ नर्मदा के पावन तट पर ज्योति प्रवाह किया गया। इसी के साथ चालीसा व्रत महोत्सव की पूर्ण आहुति सम्पन्न हुई। श्रद्धालुओं ने पुण्य सलिला नर्मदा में दीप प्रवाहित कर मनोकामनाएँ व्यक्त कीं। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
धर्मसभा में विधायक अशोक रोहाणी ने कहा कि चालीसा व्रत महोत्सव आस्था और भक्ति का महापर्व है, जिसे सिंधी समाज बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाता है।
भक्ति से मन होता है निर्मल: स्वामी अशोकानंद
स्वामी अशोकानंद महाराज (भक्ति धाम) ने धर्मसभा में कहा कि भक्ति पूर्ण साधना से मन निर्मल बनता है। व्रत-चालीसा संयम, नियम और स्वाध्याय का प्रतीक है। संकल्पपूर्वक साधना करने से चित्त शांत और जीवन सार्थक बनता है।
यात्रा मे सिंधी समाज के सर्वश्रीआयोजन समिति के मोतीलाल पारवानी उद्धवदास पारवानी, शमन असवानी, दिलीप तलरेजा, रामचंद्र आहूजा, रमेश आहूजा, उमेश पारवानी, राजकुमार कांधारी, माधवदास कुंदवानी, श्रीचंद मध्यांनी, कैलाश वासवानी, धर्मेंद्र मंगलानी, त्रिलोक वासवानी, ताराचंद खत्री, सुरेश असवानी, सुधीर भागचांदनी, गोविन्द हीरानी, प्रकाश आहूजा, प्रकाश आसवानी, राजा सावलानी, अजय सुखवानी, हरीश आहूजा, ऋतू वासवानी, सोनी वासवानी, वेदिका, रतलानी, अनीता भाटिया, ममता, पिंकी, काजल खेमानी, सीमा भाटिया, वर्षा रामचंदनी, ऋतू रामचदानी सभी अनुष्ठान में शामिल हुए।



