असद के एनकाउंटर पर सियासती रुन्दन-विलाप

असद के एनकाउंटर पर सियासती रुन्दन-विलाप

उमेश पाल और दो पुलिसकर्मियों की मौत पर चुप्पी क्यों?

नवनीत दुबे| सर्वविदित है बीते कुछ सालों में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार के सत्ता संभालते ही अनेकों बदलाव आए हैं, जिनमें प्रमुखतह कुख्यात गैंगस्टर, माफियाओं और आताताइयों पर नकेल कस कर इनके ख़ौफ को जमींदोज कर दिया गया है, जिसके चलते विरोधी दलों की कश्मसाहट स्पष्ट दृष्टिगत हो रही है, बीते दिन कुख्यात माफिया अतीक अहमद के बेटे का उत्तरप्रदेश पुलिस व एस, टी,एफ, द्वारा एनकाउंटर किया गया जिसमें असद और अतीक के गुर्दे गुड्डू मुस्लिम की मौत हुई बस फिर क्या था योगी विरोधियों ने इन आता ताई अपराधियों की मौत को राजनीतिक रंग देकर सियासत रुन्दन-विलाप का चीख चीख कर प्रदर्शन शुरू कर दिया, दुर्भाग्य कहेंगे कि माफियाओं और कुख्यात अपराधियों के यह हमदर्द पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करके खाकी की गरिमा, कर्तव्य निष्ठा को धूमिल करने का लज्जित कार्य कर रहे हैं, ऐसी नहीं है कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि योगी सरकार के पूर्व उत्तर प्रदेश में जितने भी सत्ता धीश हुए हैं उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस विभाग को अपना गुलाम बना कर रखने की आदत पड़ गई थी यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारी चाहे पुलिस महकमे का हो या फिर प्रशासनिक सभी की पद गरिमा को पैरों तले रौंद कर अपमानित किया जाता था? संभव है कि गुलामी प्रथा के पोषक उन सत्ताधीशों को यह बात नागवार गुजर रही हो कि पुलिस विभाग व प्रशासन निर्भीक निडर स्वतंत्र होकर आज कर्तव्यनिष्ठा का बखूबी पालन कैसे कर रहा है, मुद्दे की बात पर आते हैं बीते माह हुए उमेश पाल और 2 पुलिसकर्मियों की सरेआम जिस निर्मलता से हत्या की गई वह हृदय को झकझोर देने वाली थी किंतु तब ना तो अखिलेश यादव की जुबान से संवेदना निकली और ना ही जनाब ओवैसी ने दुख व्यक्त किया विडंबना ही कहेंगे कि वोटों की राजनीति के चलते अखिलेश ओवेसी व अन्य विपक्षी दल एकजुट हो एक हत्यारे की मौत पर दुख व्यक्त कर रहे हैं और कुख्यात माफिया अतीक अहमद से परिवारिक मधुर संबंध का परिचय देते हुए रुंदन विलाप कर रहे हैं ? समूचे परिपेक्ष को दृष्टिगत रखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय संविधान की महत्वता व सम्मान को दरकिनार करने वाले कुछ सफेदपोश वर्तमान में भारतीय संविधान व कानून की दुहाई दे रहे हैं, साथ ही योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली व रणनीति से भयभीत हैं क्योंकि बुलडोजर और एनकाउंटर के माहौल में माफिया कुख्यात गैंगस्टर व उनके सरपरस्त सुकून की नींद को तरस रहे हैं?

अतीक ओर अशरफ की खुलेआम गोली मारकर हत्या कुछ संकेत दे रही है?

शनिवार का दिन अतीक की मौत के लिए नियत था जिसका अतीक को तनिक भी अंदाजा नही था मीडियाकर्मी के भेष में आय हत्यारो ने अन्धधुन्ध फायरिंग की ओर पुलिस की मौजूदगी में अतीक व अशरफ की हत्या को अंजाम दिया हालांकि गोली मारने के बाद हत्यारो ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया, मुद्दे की बात ये है कि आखिर अतीक की जिंदगी से किसको खतरा था ऐसे को लोग थे जिन्हें भय था कि कुख्यात अतीक पुलिस के सामने उनके नाम का खुलासा न कर दे जो माफिया अतीक की गुनाह की सल्तनत को वृहद रूप देने में सहायक रहे है ये कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि जिन सियासत दरों ने अतीक को गैंगस्टर से माफिया ओर सांसद तक बनाय था संभवतः उन्हें ये खतरा था कि जिस अतीक के ख़ौफ का इस्तेमाल करके सत्ता सुख ले रहे थे वर्तमान में योगी की भाजपा सरकार के सामने अतीक उनके नाम उजागर न कर दे जिससे उनका राजनीतिक भविष्य गुमनामी के अंधरे में खो जाय और सफेदपोश लिबास ओर राजनीतिक चेहरे पर अपराधियो को बढ़ावा देने का रहस्य उजागर हो जाय वैसे सियासत के महारथी अतीक की मौत पर भाजपा की योगी सरकार को ही निशाने पर लेकर आरोप प्रत्यारोप करेंगे लेकि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायगी अतीक असरफ की हुई हत्या की विस्तृत विवरण साइड लुक आगामी अंक में करेगा|

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