जिले में सातों जनपद पंचायत में अमृत सरोवर योजना के तहत लगभग 101 तालाब, वाटर सेट और परकुलेसन टैंक स्वीकृत हुए, जिनके निर्माण में लगभग 4332.68 करोड़ रूपये की राशि खर्च कर निर्माण कराया गया है। गौरतलब यह है कि जिले में गर्मी के दिनों में पानी की बहुत समस्या रहती है, इसलिए यहां योजना के तहत अधिक तालाब तो बनाए गए लेकिन करोड़ों रुपए खर्च के बावजूद उसका लाभ आम आदमी को नहीं मिला रहा है।

डिंडौरी,रामसहाय मर्दन। विगत दिनों कलेक्टर विकास के द्वारा जिला पंचायत में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक की गई । बैठक में कलेक्टर मिश्रा ने 5 फरवरी 2024 तक हस्तांतरित होने वाले नल जल योजनाओं की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। ऐसे नल जल योजनाएं जहां की नल जल योजनाओं के हस्तांतरण में समस्या आ रही है। उन ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक का प्रशिक्षण आईएसए संस्था के माध्यम से कराने के निर्देश दिये।
प्रधानमंत्री जनमन योजना में शामिल 346 बसाहट 89 हाट बाजार ग्राम, मेले, सी एस सी सेंटर में पेयजल की समुचित व्यवस्था करने को कहा गया। साथ ही पेयजल परिवहन वाले ग्रामों में परिवहन के पूर्व पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये। जहां परिवहन की विशेष आवश्यकता है, सर्वे कर ऐसे ग्राम पंचायत में आवंटित्त टैंकर से परिवहन कराने के निर्देश दिये गये। कलेक्टर ने कहा कि समस्याग्रस्त ग्रामों में निजी नलकूप अधिग्रहित करने हेतु ग्राम सभा में प्रस्ताव करने के निर्देश दिये हैं। कुओं और झिरिया के मरम्मत कार्य हेतु जनपद पंचायत/ग्राम पंचायत से समन्वय स्थापित कर मरम्मत कराने एवं क्लोरिनेशन करने के निर्देश दिए। साथ ही पेयजल को लेकर अनावश्यक चकाजाम करने के लिए उकसाने वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध दर्ज कराने के निर्देश दिये हैं। लेकिन ग्रामीण यांत्रिकी सेवा डिंडौरी के करोड़ों रुपए खर्च जिन आम आदमी के 101 अमृत सरोवर योजना के तहत बड़े—बड़े तालाब का निर्माण कराया गया जो विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण गर्मी से पहले ही सूख गए उनपर कार्रवाई करने से परहेज कर रही है। आम जनता पानी की समस्या पर विरोध करें कलेक्टर के द्वारा कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन विभागीय के लापरवाही के कारण करोड़ों रू. की लागत से बने सूखे अमृत सरोवर तालाब के जिम्मेदारों के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के खबरों के माध्यम से जिला प्रशासन के संज्ञान के आने के बावजूद मेहरबान नजर आ रही है। आखिर क्यों ?

सरहरी, बहेरा और अतरिया अमृत सरोवर तालाब में एक बूंद पानी नहीं ….

दरअसल गर्मी के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से निपटने और भूजल स्तर का बरकरार के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अमृत सरोवर योजना की शुरूआत की। योजना के तहत जिले में अमृत सरोवर भी बन गए, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की आहट होने लगी है तो ऐसे में जिलेभर के कई अमृत सरोवरों डिंडौरी जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत सरहरी अमृत सरोवर तालाब, अमरपुर जनपद के ग्राम पंचायत बहेरा, ग्राम पंचायत रमपुरी के तालाब सहित समनापुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत अतरिया के बीजापुरी में लाखों रुपए की तालाब में बूंद भर पानी नहीं है।
इन सरोवरों में धूल उड़ रही है। न तो ये सरोवर क्षेत्र का जल स्तर बढ़ाने में कामयाब हुए और न ही जल संग्रहण के काम आ सकें। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले में इस योजना के तहत बनाए गए अमृत सरोवरों पर करोड़ों रूपये की राशि खर्च हो गई है, अधिकांश सरोवर पूर्ण हो चुके हैं लेकिन यह तालाब सूखा, खाली पड़े हुए हैं, इनके बनने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस गर्मी में लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि इन तालाबों में पानी होता तो क्षेत्र का जल स्तर बढ़ता और गर्मी के दिनों में पशु पक्षियों के लिए पानी मिलता, लेकिन यह योजना मूल उददेश्य की पूर्ति नहीं कर सकीं।

 

तालाब निर्माण में विभागीय उपयंत्री और सहायक यंत्री के मिलीभगत से किया गया भ्रष्टाचार…..
बता दें कि उक्त अमृत सरोवर तालाब जो नवंबर— दिसंबर के महीने में सूख गए हैं वो बरसात से की पानी से लबालब भरा हुआ था लेकिन पटल के नीचे से पानी का लगातार रिसाव होने के कारण पानी गर्मी से पहले सूख गया। जिसे देखकर लगता हैं की ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के जिम्मेदारों के द्वारा ठेकेदार से मिलीभगत कर तालाब निर्माण में भारी गडबडी कर भ्रष्टाचार करते हुए स्वंय को आर्थिक लाभ पहुंचाने के चक्कर में गुणवत्ताहीन तालाब का निर्माण कराया गया। जिसकी वजह से लाखों करोड़ों रू. खर्च के बावजूद तालाब पूरी तरह सूख चुकी है। तालाब में अब धूल उड़ रही है। कार्यस्थल मुरमी पहाड़ी होने के साथ ही पानी का कोई जीवित जल स्त्रोत नहीं होने के चलते भविष्य में भी अनुपयोगी ही साबित होगी। क्योंकि तालाब के नींव से लगातार तेजी से पानी निकल रहा था जिसकी वजह से तालाब गर्मी से पहले सूख गया। वहीं जब संबंधित उपयंत्रियों के द्वारा अपने भ्रष्टाचार को छुपाने ,तालाब सूखने के कम वर्षा , अगले वर्ष से पानी रुकने जैसे तमाम प्रकार की बहाने बताए जा रहे हैं।
आम आदमी की विरुद्ध कार्रवाई करना तो आसान, भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध करें तो जानने…?
सरकारी के द्वारा जनहितेषी के योजना तहत अनेक निर्माण कार्य जिले में कराया जा रहा है लेकिन योजनाओं को विभागीय अधिकारियों के द्वारा ठेकेदारो से मिलीभगत कर स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचने के चक्कर गुणवत्ता विहीन निर्माण किया जाता है जिससे आम आदमी को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है लेकिन सरकारी योजना में धांधली करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई नहीं किया जा रहा। आम आदमी की विरुद्ध कार्रवाई करना तो आसान है भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो जाने….?

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