पोर्टल में लग रहे फर्जी बिल और हो रहे है भुगतान….
जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलाई का मामला….
सरकारी पोर्टल में खुलके किया जा रहा भ्रष्टाचार….
आला अधिकारी मौन क्यों❓ क्या है मिलीभगत….

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पोर्टल में लग रहे फर्जी बिल और हो रहे है भुगतान….जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलाई का मामला….सरकारी पोर्टल में खुलके किया जा रहा भ्रष्टाचार….आला अधिकारी मौन क्यों❓ क्या है मिलीभगत….डिंडौरी,रामसहाय मर्दन | आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी में आज भ्रष्टाचार गबन चरम सीमा में पहुँच चुका है। वही जिन्हें भ्रष्टाचार रोकने की जबाबदारी दी गई है वह भी पैसो की चमक के आगे नतमस्तक हो चुके है जिसे देखकर लगता है कि जिम्मेदारों के द्वारा भ्रष्टाचार गबन करने की आजादी दे दी गई है। एक ओर प्रदेश की सरकार चाह रही है कि सब कुछ पारदर्शिता हो जो हो रहा वह ऑनलाईन और पोर्टल के जरिये सब देख सके कि क्या कार्य हुए, कितना कार्य हुआ, बिल किसका लगा, कौन सही या गलत, सब दिखाई पड़े की सही गलत क्या हैं। लेकिन धुंधले बिलों को पोर्टल में लग कर फर्जी बिलों का भुगतान करा रहे है।सरकारी पोर्टल में खुलके किया जा रहा भ्रष्टाचार….गौरतलब यह है कि जिन सरकारी पोर्टल को पारदर्शिता के मंशा से बना गया था आज उन्हें सरकारी पोर्टल में खुलके भ्रष्टाचार किया जा रहा है, फर्जी बिल लगा रहे है।ऐसे-ऐसे बिल लग रहे है कि सीमेंट के दुकान से स्टेशनरी खरीदी जा रही है और किराना दुकान से रेत लोहा खरीदने के बिल पोर्टल में लग रहे और भुगतान हो रहे, आज कोई इन बिलों की रेख-देख नही कि जा रही और इन फर्जी बिलों से बेजा फर्जी भुगतान लिया जा रहा है कुछ बिल ऐसा भी है जो पोर्टल में बिल लगे है वह पढने भी नहीं जा सकते है। धुंधले बिलों के जरिए लाखों रू का फर्जी भुगतान किया जा रहा है।दरअसल ऐसा ही मामला डिंडौरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलाई का सामने आया है जहां पंचायत सचिव जगदीश धुर्वे के द्वारा पंचायत दर्पण में लगाए गए बिल पूरी तरह धुंधला, जिसे दूरबीन लगाकर भी नहीं पढ़ा जा है। आखिर धुंधला बिल क्यों लगाया जा रहा है। कहीं फर्जी बिल लगाकर भुगतान तो नहीं किया जा रहा है। बता दें कि ऐसी मामलों को लेकर समय-समय पर शिकायतें होती भी है पर उन शिकायत की फाइल धूल खाती रहती है।डिंडौरी जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली पंचायतों में धुंधले बिलों को पोर्टल पर अपलोड करना आम बात हो गई है। पंचायत सचिव के द्वारा हजारों बिलों को धुंधला कर के अपलोड कर आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है, परंतु जनपद प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास आखिर कब तक चलेगा। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत पंचायतों में “पंचायत दर्पण” में लगे बिल को पूरी तरह धुंधला कर दिया गया है या फिर सीमेंट के दुकान से स्टेशनरी खरीदी का फर्जी बिल या खरीदे गए समान के दुगने बिल का भुगतान कराया जा रहा है। पंचायत दर्पण में लगे बिलों देखाकर साफ अनुमान लगा सकता है कि सचिव जानबूझ कर धुंधला बिल लगाते है जिससे किस फर्म में किस सामग्री का बिल लगा है पता न चल पाये। सूत्रों की माने तो ग्रामवासी अगर सचिव से पूछते हैं कि किस सामग्री का बिल लगा है तो सचिव जवाब देते है नेट से निकाल लीजिये, जब पंचायत दर्पण पर लोग बाग देखने पहुंचते है तो वहां बिल ही धुंधला मिलता है, कुल मिलाकर भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए यह खेल खेला जाता है।आला अधिकारी मौन क्यों❓ क्या है मिलीभगत…..प्रशासन को चुनौती देते हुये डिंडौरी जनपद क्षेत्रों की ग्राम पंचायतें धुंधला बिल लगाई जा रही हैं । धुंधले बिल से यह जाहिर नहीं हो पाता है, कि बिल सही लगा है या गलत आखिर उपर बैठे उच्चाधिकारी इसको रोक क्यों नहीं पा रहे हैंए यह भी एक बडा सवाल है कि कहीं उच्चाधिकारियों की रजामंदी से यह सब तो नहीं हो रहा है, शायद इसी वजह से उच्चधिकारी मौन रहते हैं, उपर बैठे अधिकारी पंचायतों के कर्मचारियों के काले कारनामों या धुंधले बिल, बिना समान खरीदे के बिल का कभी जांच तक नहीं करते है, कुल मिलाकर कार्रवाई न होना अधिकारियों के कमीशन की तरफ इशारा करता है। क्या आला अधिकारियों की मिलीभगत खुलेआम भ्रष्टाचार को छुपाने का यह खेल खेला जा रहा है।
डिंडौरी,रामसहाय मर्दन | आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी में आज भ्रष्टाचार गबन चरम सीमा में पहुँच चुका है। वही जिन्हें भ्रष्टाचार रोकने की जबाबदारी दी गई है वह भी पैसो की चमक के आगे नतमस्तक हो चुके है जिसे देखकर लगता है कि जिम्मेदारों के द्वारा भ्रष्टाचार गबन करने की आजादी दे दी गई है। एक ओर प्रदेश की सरकार चाह रही है कि सब कुछ पारदर्शिता हो जो हो रहा वह ऑनलाईन और पोर्टल के जरिये सब देख सके कि क्या कार्य हुए, कितना कार्य हुआ, बिल किसका लगा, कौन सही या गलत, सब दिखाई पड़े की सही गलत क्या हैं। लेकिन धुंधले बिलों को पोर्टल में लग कर फर्जी बिलों का भुगतान करा रहे है।
सरकारी पोर्टल में खुलके किया जा रहा भ्रष्टाचार….
गौरतलब यह है कि जिन सरकारी पोर्टल को पारदर्शिता के मंशा से बना गया था आज उन्हें सरकारी पोर्टल में खुलके भ्रष्टाचार किया जा रहा है, फर्जी बिल लगा रहे है।ऐसे-ऐसे बिल लग रहे है कि सीमेंट के दुकान से स्टेशनरी खरीदी जा रही है और किराना दुकान से रेत लोहा खरीदने के बिल पोर्टल में लग रहे और भुगतान हो रहे, आज कोई इन बिलों की रेख-देख नही कि जा रही और इन फर्जी बिलों से बेजा फर्जी भुगतान लिया जा रहा है कुछ बिल ऐसा भी है जो पोर्टल में बिल लगे है वह पढने भी नहीं जा सकते है। धुंधले बिलों के जरिए लाखों रू का फर्जी भुगतान किया जा रहा है।
दरअसल ऐसा ही मामला डिंडौरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलाई का सामने आया है जहां पंचायत सचिव जगदीश धुर्वे के द्वारा पंचायत दर्पण में लगाए गए बिल पूरी तरह धुंधला, जिसे दूरबीन लगाकर भी नहीं पढ़ा जा है। आखिर धुंधला बिल क्यों लगाया जा रहा है। कहीं फर्जी बिल लगाकर भुगतान तो नहीं किया जा रहा है। बता दें कि ऐसी मामलों को लेकर समय-समय पर शिकायतें होती भी है पर उन शिकायत की फाइल धूल खाती रहती है।

डिंडौरी जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली पंचायतों में धुंधले बिलों को पोर्टल पर अपलोड करना आम बात हो गई है। पंचायत सचिव के द्वारा हजारों बिलों को धुंधला कर के अपलोड कर आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है, परंतु जनपद प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास आखिर कब तक चलेगा। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत पंचायतों में “पंचायत दर्पण” में लगे बिल को पूरी तरह धुंधला कर दिया गया है या फिर सीमेंट के दुकान से स्टेशनरी खरीदी का फर्जी बिल या खरीदे गए समान के दुगने बिल का भुगतान कराया जा रहा है। पंचायत दर्पण में लगे बिलों देखाकर साफ अनुमान लगा सकता है कि सचिव जानबूझ कर धुंधला बिल लगाते है जिससे किस फर्म में किस सामग्री का बिल लगा है पता न चल पाये। सूत्रों की माने तो ग्रामवासी अगर सचिव से पूछते हैं कि किस सामग्री का बिल लगा है तो सचिव जवाब देते है नेट से निकाल लीजिये, जब पंचायत दर्पण पर लोग बाग देखने पहुंचते है तो वहां बिल ही धुंधला मिलता है, कुल मिलाकर भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए यह खेल खेला जाता है।
आला अधिकारी मौन क्यों❓ क्या है मिलीभगत…..
प्रशासन को चुनौती देते हुये डिंडौरी जनपद क्षेत्रों की ग्राम पंचायतें धुंधला बिल लगाई जा रही हैं । धुंधले बिल से यह जाहिर नहीं हो पाता है, कि बिल सही लगा है या गलत आखिर उपर बैठे उच्चाधिकारी इसको रोक क्यों नहीं पा रहे हैंए यह भी एक बडा सवाल है कि कहीं उच्चाधिकारियों की रजामंदी से यह सब तो नहीं हो रहा है, शायद इसी वजह से उच्चधिकारी मौन रहते हैं, उपर बैठे अधिकारी पंचायतों के कर्मचारियों के काले कारनामों या धुंधले बिल, बिना समान खरीदे के बिल का कभी जांच तक नहीं करते है, कुल मिलाकर कार्रवाई न होना अधिकारियों के कमीशन की तरफ इशारा करता है। क्या आला अधिकारियों की मिलीभगत खुलेआम भ्रष्टाचार को छुपाने का यह खेल खेला जा रहा है।


