करोड़ों की लाइमस्टोन चोरी कर बेची, 7 महीने बाद भी नहीं मिली जमीन वापस,
नाबालिग की मौत का मामला भी दबा, चार विभागों की चुप्पी पर उठे सवाल
साईडलुक, मैहर। मैहर जिले के भटूरा क्षेत्र में हुकुमचंद स्टोन लाइम कंपनी पर एक आदिवासी की निजी जमीन पर अवैध कब्जा कर बड़े पैमाने पर खनन करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित आदिवासी युवराज सिंह गौड़ ने जिला कलेक्टर को दी शिकायत में बताया है कि कंपनी के छह साझेदार ऋषभ जैन, सुधीर जैन, मनीष जैन, सुशील जैन, सिद्धांत जैन और सौरव जैन ने मिलकर बिना किसी वैध भू-प्रवेश अनुमति के उनकी लगभग 10 एकड़ से अधिक भूमि को खोद डाला और निकाले गए कीमती पत्थरों को बाजार में बेचकर करोड़ों का आर्थिक लाभ कमाया।
एसडीएम के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
इस मामले में पहले भी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मैहर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद 11 मार्च 2025 को एसडीएम ने आदेश जारी कर अवैध खनन की पुष्टि की थी और कंपनी को 7 दिनों के भीतर जमीन खाली करने तथा पीड़ित को कब्जा वापस दिलाने के निर्देश दिए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश जारी हुए लगभग 7 महीने बीत जाने के बाद भी जमीन आज तक खाली नहीं कराई गई है और पीड़ित अपनी ही जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
आरटीआई से खुलासा, बिना अनुमति चल रहा खनन
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार हुकुमचंद कंपनी को संबंधित भूमि पर खनन की कोई वैध अनुमति नहीं है। इसके बावजूद खदान में उत्खनन का कार्य लगातार जारी है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या खनिज विभाग जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा है या फिर प्रशासनिक अधिकारियों पर किसी का दबाव है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई गरीब व्यक्ति छोटी सी सरकारी जमीन पर निर्माण करता है तो तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े खनन संचालकों के खिलाफ एसडीएम के स्पष्ट आदेश के बाद भी पूरा तंत्र निष्क्रिय बना हुआ है।
नाबालिग की मौत का मामला भी ठंडे बस्ते में
यह हुकुमचंद कंपनी के खिलाफ पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी खदान में एक नाबालिग मजदूर की मौत का मामला भी सामने आ चुका है। आरोप है कि खदान में नाबालिग से अवैध श्रम कराया जा रहा था और हादसे के बाद भी प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की। गंभीर धाराएँ जैसे गैर-इरादतन हत्या तक लागू नहीं की गईं, जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
भटूरा में अवैध खनन का फैला जाल, चार विभाग मौन
स्थानीय सूत्रों के अनुसार भटूरा और आसपास के क्षेत्रों में हुकुमचंद कंपनी के संचालकों द्वारा कई खदानें बिना वैध लीज के संचालित हो रही हैं। वन क्षेत्र के बेहद नजदीक भी अवैध उत्खनन किया जा रहा है और पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। इस पूरे मामले में खनिज विभाग, वन विभाग, श्रम विभाग और पर्यावरण विभाग इन चार प्रमुख विभागों पर कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे रखने का आरोप है। विशेष रूप से वन विभाग की निष्क्रियता से जंगलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है और खनिज विभाग पर खनन माफिया से मिलीभगत कर मामले को मैनेज करने के आरोप लग रहे हैं।
अब कमिश्नर से न्याय की उम्मीद
प्रशासनिक अनदेखी से परेशान होकर पीड़ित युवराज सिंह गौड़ ने अब मामले को रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद के समक्ष ले जाने की तैयारी कर ली है। उम्मीद की जा रही है कि उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच के बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हो सकेगा और पीड़ित को न्याय मिल पाएगा।
विकास या प्राकृतिक संसाधनों का दोहन
भटूरा क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है वह विकास नहीं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और कानून का खुला दोहन प्रतीत होता है। एक ओर आदिवासी अपनी ही जमीन के लिए 7 महीने से भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर खनन माफिया बेखौफ होकर संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी, गरीब और कमजोर वर्गों का शोषण बढ़ेगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा पूरी तरह कमजोर हो जाएगा।

