कोदो और अरहर के प्रदर्शन प्लॉट देखे, बीआरसी सेंटरों पर जैविक आदानों के निर्माण का लिया जायजा
साईडलुक, जबलपुर। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देश पर जिले में उन्नत कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में गुरूवार को कृषि अधिकारियों के दल ने कुंडम विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का सघन भ्रमण कर फसल प्रदर्शन प्लॉटों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और किसानों को वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
अधिकारियों ने सबसे पहले ग्राम लखनवारा में कृषक जय हिंद के खेत पर लगाए गए कोदो के प्रदर्शन प्लॉट का अवलोकन किया। इसके बाद ग्राम टिकरिया में कृषक मनोज कुमार साहू के अरहर प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने दोनों फसलों की वर्तमान वृद्धि, पौधों की स्थिति और खेत प्रबंधन का बारीकी से जायजा लिया। मौके पर मौजूद किसानों को अधिकारियों ने समय पर निराई-गुड़ाई, संतुलित जल प्रबंधन, कीट एवं रोगों की पहचान और उनके प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन प्लॉट का उद्देश्य किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का प्रत्यक्ष उदाहरण दिखाना है, ताकि अन्य किसान भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की जानकारी भी किसानों को दी और योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा है कि किसानों की आय में वृद्धि हो और खेती टिकाऊ बने।
फसल निरीक्षण के बाद दल ने कुरगवां और बरखेड़ा स्थित बायो रिसोर्स सेंटर यानी बीआरसी सेंटर का भी निरीक्षण किया। यहां अधिकारियों ने जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक और जैविक कृषि आदानों के निर्माण की प्रक्रिया को देखा। बीआरसी सेंटरों को प्राकृतिक खेती की रीढ़ बताया जा रहा है, जहां गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और विभिन्न वनस्पतियों से जैविक आदान तैयार किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि इन जैविक आदानों के नियमित उपयोग से खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग में काफी कमी आएगी। इससे न केवल भूमि की उर्वरता शक्ति में सुधार होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। जैविक आदानों से तैयार फसल अधिक पौष्टिक होती है और बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है, जिससे खेती की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
अधिकारियों ने सभी किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सोच के साथ प्राकृतिक खेती को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और गांव के अन्य किसानों को भी इसके लिए जागरूक करें।
इस निरीक्षण दल में उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास यू के कटहरे, अनुविभागीय कृषि अधिकारी जबलपुर श्रीमती प्रतिभा गौर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कुंडम एलपी उइके, कृषि विस्तार अधिकारी डॉ सुनी ठाकुर, प्रांजली वर्मा और दीपांशु सोनी शामिल रहे।

