कलेक्ट्रेट डिंडौरी में समय-सीमा बैठक के दौरान कलेक्टर श्रीमती नेहा मारव्या ने जिले के विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया। सीएम हेल्पलाइन को नजरअंदाज करने वाले अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही बारिश, स्वास्थ्य, अतिक्रमण, अवैध शराब, वन्य-हाथी क्षति और अधूरे आवास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| कलेक्टर श्रीमती नेहा मारव्या की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समय-सीमा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की लंबित प्रकरणों की समीक्षा के साथ जनहित से जुड़े मुद्दों पर निर्देश दिए गए। बैठक में एसडीएम शहपुरा ऐश्वर्य वर्मा, एसडीएम बजाग रामबाबू देवांगन, डिप्टी कलेक्टर वैधनाथ वासनिक, एएसपी अमित वर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों को समय पर हल न करने पर नाराजगी जताते हुए जिला परिवहन अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना जांच किसी भी शिकायत को आगे न बढ़ाया जाए और जिन विभागों की 100 दिवस से अधिक लंबित शिकायतें हैं, उन्हें एक सप्ताह में हल किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में सभी जलस्रोतों में क्लोरीन ब्लीचिंग अनिवार्य रूप से कराई जाए, जिससे जलजनित बीमारियों से बचाव हो सके। सर्पदंश की दवाएं सभी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। अवैध शराब बिक्री पर सख्ती दिखाते हुए आबकारी अधिकारी व तहसीलदार डिंडौरी को छापामार कार्रवाई कर कानूनी कार्यवाही करने को कहा गया।
अतिक्रमण और मादक पदार्थों की दुकानों पर कड़ा रुख अपनाते हुए, कलेक्टर ने सीएमओ नगर परिषद को शैक्षणिक संस्थानों के पास लगी नशीली दुकानों को हटाने और बार-बार चेतावनी के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने वालों पर चालानी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे कार्यों पर नाराजगी जाहिर करते हुए नगर परिषद सीएमओ को 8 वर्षों से अधूरे पड़े 348 आवासों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, जिनमें से अब तक केवल 88 वितरित हुए हैं।
बरसात और आपदा प्रबंधन को लेकर सभी एसडीएम, तहसीलदारों को सतर्क रहने, जर्जर भवनों के उपयोग पर रोक लगाने, और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। जनता से अपील की गई है कि नदी-नालों में बहते पानी को पार न करें, कमजोर मकानों से दूर रहें और प्रशासनिक अलर्ट का पालन करें। वन विभाग को हाथियों द्वारा फसलों और मकानों को नुकसान पहुँचाने की जांच कर राहत राशि शीघ्र प्रदान करने और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के निर्देश दिए।



