तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाई सजा, 3000 रुपये अर्थदण्ड भी लगाया
साईडलुक, डिण्डौरी। नाबालिग छात्रा को प्रेम प्रस्ताव देकर लगातार परेशान करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में डिण्डौरी न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आरोपी को विभिन्न धाराओं में बीस वर्ष के कठोर कारावास सहित कुल चार धाराओं में सजा से दण्डित किया गया है।
मीडिया सेल प्रभारी अभियोजन अधिकारी दिलावर धुर्वे ने बताया कि यह मामला थाना मेहदवानी जिला डिण्डौरी के अपराध क्रमांक 63/2025 और सत्र प्रकरण क्रमांक एससी 21/2025 से संबंधित है। आरोपी आशुतोष पिता अशोकदास उम्र 27 वर्ष निवासी ग्राम राममुडी थाना मेहदवानी जिला डिण्डौरी को न्यायालय ने दोषी करार दिया है।
क्या था पूरा मामला
घटना के समय पीड़िता की उम्र 14 वर्ष थी और वह कक्षा दसवीं में अध्ययनरत थी। अभियोजन के अनुसार घटना से लगभग एक वर्ष पूर्व जब पीड़िता रामनवमी के दूसरे दिन अकेले काम से जा रही थी, तभी उसके दूर के रिश्तेदार आरोपी ने रास्ता रोक लिया और उससे आपत्तिजनक बातें कहीं। पीड़िता ने इसका विरोध किया और घर लौट आई। इसके बाद भी आरोपी ने उसका पीछा करना नहीं छोड़ा। पीड़िता जहां भी मिलती, आरोपी उसे परेशान करता और यह बात किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देता। आरोपी खुद के मर जाने की बात कहकर भी उसे डराता था, जिसके कारण भयभीत पीड़िता ने लंबे समय तक परिजनों को कुछ नहीं बताया। बाद में परिजनों को जानकारी मिलने पर थाना मेहदवानी में प्रकरण पंजीबद्ध कराया गया। पुलिस ने विवेचना पूर्ण कर चालान न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय ने सुनाई यह सजा
मामले की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश जिला डिण्डौरी द्वारा की गई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 127(2) के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 500 रुपये अर्थदण्ड, अर्थदण्ड अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कठोर कारावास, धारा 65(1) के तहत बीस वर्ष का कठोर कारावास और 1000 रुपये जुर्माना, जुर्माना न भरने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(एन)/6 के तहत बीस वर्ष का कठोर कारावास और 1000 रुपये अर्थदण्ड, राशि जमा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास तथा धारा 351(3) जान से मारने की धमकी के अपराध में एक वर्ष का कठोर कारावास और 500 रुपये अर्थदण्ड, राशि अदा न करने पर एक माह के अतिरिक्त कठोर कारावास से दण्डित किया है।
न्यायालय के इस फैसले से जिले में बाल अपराधों के विरूद्ध कड़ा संदेश गया है कि नाबालिगों को डराने धमकाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

