नवनीत दुबे जबलपुर– संस्कारधानी इन दिनों धर्म रानी बन चुकी है वैसे जबलपुर धर्म धानी तो है ही लेकिन बीते कुछ दिनों से धर्म ध्वज भगवा जगह-जगह लहरा रहा है ऐसा हो भी क्यों ना विधानसभा चुनाव के नजदीक आ रहे हैं ऐसे में जनमानस के मन मस्तिष्क में प्रवेश करने का सहज माध्यम कथा पुराणों का आयोजन ही है, और इसी बहाने प्रभु नाम का गुणगान भी हो जाएगा? विदित हो बीते जनवरी माह से निरंतर किसी न किसी नामी की रानी कथा वासियों के आयोजन हो रहे हैं जिनमें बहुतायत संख्या में कथावाचक ओं को सुनने भारी भीड़ उमड़ रही है गौरतलब यह है कि कथा वाचक कथा वर्णन के बीच बीच में आयोजक माननीय का नाम का भी खूब गुणगान करते नहीं थकते, आखिर ऐसा हो भी क्यों ना लाखों करोड़ों का खर्च वहन करके नेता जी जनमानस के बीच धार्मिकता के रंग में रंगे जो नजर आना चाहते हैं, और भारी-भरकम दक्षिणा देकर कथा पुराणों की भक्ति रस वर्षा जो करवा रहे हैं सर्वविदित है कि बीते माह जया किशोरी की भागवत कथा का आयोजन हुआ उसके बाद धीरज शास्त्री की कथा का आयोजन हुआ, हाल ही में अशोकानंद जी के शिव पुराण का आयोजन चल रहा है, तो वही मई- जून में प्रदीप मिश्रा संस्कारधानी में शिव पुराण का वाचन करेंगे, बहुत अच्छी बात है धर्म के पावन रंग से संस्कारधानी भगवा में बनी हुई है लेकिन फिर वही प्रश्नवाचक ? चुनावी साल में ही इतने बड़े-बड़े कथा वास्को के कार्यक्रमों के आयोजन करके माननीय क्या जाहिर करना चाहते हैं संभवत मंशा यही होगी कि जिन कथावाचको के आयोजन हो रहे हैं उनका जनमानस के हृदय में एक विशेष स्थान और आस्था है, और जनमानस के बीच भरे पंडाल में कथा वासियों के श्री मुख से सफेदपोश माननीयों के नाम पर लिया जाना और अपनी-अपनी विधानसभा का कर्मठ और हितेषी का आशीर्वचन इनके वोटों की संख्या में इजाफा कर सकता है, ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अगर मतदाता जागरूक है तो कथावाचक और धार्मिक आयोजनों के आधार पर नहीं माननीय के 5 साल के किए कार्यों के आधार पर ही प्रत्याशी चयन करेगा बाकी रही माननीय के हृदय की लालसा तो” तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार यह पापी मन काहे को डरे”

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