आत्मा परियोजना के तहत पिंडरई, सुहासखुर्द और इमझर में विशेषज्ञों ने किया संवाद, रासायनिक खेती छोड़ जैविक संसाधनों के उपयोग पर दिया जोर
साईडलुक, जबलपुर। आत्मा परियोजना के अंतर्गत जिले के तीन विकासखंडों में शनिवार को एक दिवसीय कृषक संगोष्ठी का आयोजन कर किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया गया और उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। यह संगोष्ठी जबलपुर विकासखंड के ग्राम पिंडरई, मझौली विकासखंड के ग्राम सुहासखुर्द तथा शहपुरा विकासखंड के ग्राम इमझर में आयोजित की गई थी।
संगोष्ठियों में कृषि विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण, जैविक एवं स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से आह्वान किया कि वे रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर लौटें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ पर्यावरण और बेहतर भविष्य की सौगात दी जा सके।
कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों और उन्हें तैयार करने की विधियों के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि वर्तमान समय में धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है। इससे न केवल लागत कम होती है बल्कि उपज की गुणवत्ता भी बढ़ती है। संगोष्ठियों में किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं को सुना गया और उनका मौके पर ही समाधान भी किया गया।
इन कृषक संगोष्ठियों में कृषि वैज्ञानिक डॉ एस बी अग्रवाल, श्रीमती सुषमा नेमा, हरीश श्रीवास्तव एवं आत्मा परियोजना के बीटीएम, एटीएम सहित बड़ी संख्या में प्रगतिशील एवं उन्नत कृषक उपस्थित रहे।

